रेलवे स्टेशन पर बहुत भीड़ थी।
मंगू पहलवान अपने दिलचस्प कारनामों को
दिखाकर बेशुमार तालियाँ बटोर रहा था।
उसका अगला कारनामा था #नींबू निचोड़ कारनामा…
पहलवान ने पूरी ताकत लगाकर इस कदर नींबू को
निचोड़ डाला कि उसमें रस का एक बूँद भी नहीं बची।
पहलवान ने सबको चैलेंज किया –
“तुममें से अगर कोई इस नींबू से अब एक बूँद भी
निकाल कर दिखा देगा,
तो मैं पहलवानी करना छोड़ दूँगा।
भीड़ में से एक दुबले से सज्जन निकले और
नींबू हाथ में लेकर उन्होंने एक नहीं, पाँच बूँदें टपका दीं।
यह देख पहलवान पसीना-पसीना होकर बोले –
“भाई साहब! आप कौन हैं ?”
साहब बोले- “हम ट्रेन में चना मसाला बेचते हैं।”😂😜😅😂😂😜
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एक औरत विधवा पेंशन का फ़ॉर्म भरने गई।
अधिकारी – कित्तो समय भओ पति को गुज़रे ?
महिला- वे तो अभै घरे परे हैं।
अधिकारी – फिर बाई फार्म काये कों भर रई ?
महिला – साहब, सरकारी काम में टेम तो लगत है ना !
जब तक मरहें तब तक बनइ जेहे।😂😜😅😂😂😜
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दो टैक्सी ड्राइवर टैक्सी स्टैंड पर बैठे बातें कर रहे थे
कि तभी एक विदेशी उनके पास पहुँचा और
उनसे अंग्रेज़ी भाषा में कुछ पूछा।
दोनों ड्राइवर बेवकूफों की तरह उस विदेशी के
चेहरे को देखते रहे। विदेशी समझ गया कि दोनों
को अंग्रेज़ी नहीं आती है।
अब उसने वही प्रश्न उनसे स्पेन की भाषा स्पेनिश में पूछा।
दोनों फिर बेवकूफों की तरह विदेशी का चेहरा देखते रहे।
तीसरी बार विदेशी ने वही प्रश्न उनसे रूस की भाषा रशियन में पूछा।
दोनों का फिर वही हाल रहा।
चौथी बार विदेशी ने वही प्रश्न उनसे जर्मनी कि भाषा जर्मन में पूछा।
दोनों फिर वैसे ही उसका चेहरा ताकते रहे।
आखिर तंग आकर विदेशी चला गया।
ड्राइवर ने कहा – यार हम लोगों को भी अपनी भाषा
के अलावा कोई दूसरी भाषा सीखनी चाहिए,
हमारे काम आएगी।
पहले वाले ने एक ज़ोर का झापड़ लगाया और बोला –
उसको तो चार चार आती थी, उसके कोई काम आई ?😂😜😅😂😂😜
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एक औरत हाँथ में हथौड़ा लिये, अपने बेटे के स्कूल
में पहुँची और चपरासी से पूछने लगी –
“शुक्ला सर” की क्लास कौन सी है ?”
हथौड़े को देखकर, चपरासी ने डरते हुए पूछा –
“क्यों पूछ रही हैं ?”
“अरे वह मेरे बेटे के क्लास टीचर हैं।
हथौड़ा हिलाते हुए, वह औरत उतावलेपन से बोली।
चपरासी ने दौड़कर शुक्ला सर को खबर दी,
कि एक औरत हाँथ में हथौड़ा लिये आपको ढूँढ रही है।
शुक्ला सर के पसीने छूट गये।
वह दौड़कर प्रिंसिपल की शरण में पहुँचे।
प्रिंसिपल तत्काल उस औरत के पास पहुँचे,
और विनम्रतापूर्वक बोले –
“कृपया करके आप शाँत हो जाईये।”
मैं शाँत ही हूँ… “वह औरत बोली।
प्रिंसिपल – “आप मुझे बताईये कि बात क्या है ?”
औरत – बात कुछ भी नही है। मैं बस शुक्ला सर
की क्लास में जाना चाहती हूँ।
प्रिंसिपल – लेकिन क्यों ?
औरत – क्यों, क्योंकि मुझे वहाँ उस बेंच की कील
ठोकनी है, जिस पर मेरा बेटा बैठता है।
क्योंकि वह स्कूल से तीन दिन में तीसरी पैंट
फाड़ कर आया है।
ये है “माँ” का प्यार😂😜😅😂😂😜
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