कितनी जहरीली हवा में हार मानता है एयर प्यूरीफायर? विशेषज्ञों ने खोला राज

देश के कई शहरों में दमघोंटू प्रदूषण लोगों की सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि घर के भीतर भी साफ हवा मिलना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में अधिकांश लोग समाधान के तौर पर एयर प्यूरीफायर का सहारा लेते हैं। लेकिन एक बड़ा सवाल उठने लगा है—क्या हर स्तर की गंदी हवा को एयर प्यूरीफायर साफ कर सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण की एक सीमा ऐसी भी होती है, जहां तकनीक भी लड़खड़ा जाती है और एयर प्यूरीफायर 100% असरदार साबित नहीं हो पाता।

कितने AQI पर कमजोर पड़ जाते हैं एयर प्यूरीफायर?

वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI जब 300 के पार जाता है, तो प्यूरीफायर सामान्यतः अधिक मेहनत करने को मजबूर हो जाते हैं। 400 से ऊपर का AQI, जिसे ‘सीवियर’ श्रेणी में रखा जाता है, मशीन के फिल्टर और मोटर पर भारी दबाव डालता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि AQI 500 या उससे अधिक होने पर कई प्यूरीफायर हवा को पूरी तरह साफ नहीं कर पाते। इसकी वजह है कि कमरे में प्रवेश करने वाली प्रदूषित हवा की मात्रा फिल्टर की क्षमता से कहीं अधिक होती है।

फिल्टर की लिमिट—HEPA भी हर बार नहीं बचा पाता

HEPA फिल्टर को हवा फिल्टरिंग का सबसे प्रभावी मानक माना जाता है, जो PM2.5 जैसी बेहद महीन कणों तक को रोक पाने में सक्षम होता है। लेकिन जब हवा में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, तो फिल्टर जल्दी चोक होने लगता है। इससे प्यूरीफायर की कार्यक्षमता अचानक कम हो जाती है और मशीन लगातार हवा को खींचने के प्रयास में गर्म होने लगती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर उपकरण की उम्र भी घट जाती है।

कमरे का आकार और सीलिंग भी तय करते हैं क्षमता

कई लोग बड़े कमरों में छोटे प्यूरीफायर का उपयोग करते हैं, जबकि यह उनके लिए पर्याप्त नहीं होता। प्यूरीफायर की क्षमता CADR (Clean Air Delivery Rate) पर निर्भर करती है। यदि कमरे में कई बार बाहर की हवा प्रवेश कर रही है या खिड़कियाँ पूरी तरह सील नहीं हैं, तो प्रदूषित हवा की मात्रा लगातार बढ़ती रहती है। ऐसी स्थिति में मशीन चाहे कितनी भी उन्नत हो, वह अंदर की हवा को 100% साफ नहीं कर सकती।

प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर क्या करें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब AQI बहुत अधिक हो—

खिड़कियाँ-दरवाजे यथासंभव बंद रखें

कमरे के अनुसार सही क्षमता वाला प्यूरीफायर चुनें

फिल्टर की नियमित सफाई और समय पर बदलाव बेहद आवश्यक है

अत्यधिक स्थिति में हवा को साफ रखने के लिए दो प्यूरीफायर का उपयोग भी प्रभावी हो सकता है

साथ ही घर में धुआँ, अगरबत्ती, मोमबत्ती और कुकिंग से होने वाले प्रदूषण को सीमित रखने की सलाह दी जाती है।

क्या समाधान सिर्फ तकनीक है?

विशेषज्ञों का मत है कि एयर प्यूरीफायर केवल एक सीमित दायरे तक ही राहत दे सकते हैं। जब शहर की हवा अत्यधिक विषैली हो जाती है, तो मूल समाधान प्रदूषण कम करना ही है—यानी वाहनों से निकलने वाला धुआँ, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण से उड़ने वाली धूल पर सख्त नियंत्रण।

यह भी पढ़ें:

हद से ज्यादा पानी पीना हो सकता है खतरनाक, लिवर को भी पहुंचा सकता है नुकसान