कई लोग अक्सर इस समस्या से जूझते हैं कि अचानक एक या दोनों कानों से आवाज़ धीमी सुनाई देने लगती है। साधारण बातचीत भी अस्पष्ट लगती है और कान भरे–भरे से प्रतीत होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मामलों में इसके पीछे एक ही कारण होता है—कान में जमा हुआ अतिरिक्त मैल या वैक्स। सामान्य स्थिति में यह मैल कान को धूल, कीटाणुओं और नमी से बचाने का काम करता है, लेकिन जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है, तो यह सुनने की क्षमता को प्रभावित करने लगता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कान का मैल स्वयं ही प्राकृतिक रूप से बाहर निकल आता है, परंतु कई बार यह इतना कठोर या अधिक मात्रा में जमा हो जाता है कि इसे सफ़ाई की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि, गलत तरीके अपनाने से कान को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कान की सफ़ाई के लिए सुरक्षित और प्रमाणित तरीकों का प्रयोग करना बेहद ज़रूरी है।
नीचे 5 उपाय दिए जा रहे हैं, जिन्हें डॉक्टर भी सुरक्षित मानते हैं और जिनसे कान के मैल को ढीला कर हटाने में मदद मिल सकती है।
1. गुनगुने पानी से कान की सिंचाई
कान में हल्का गुनगुना पानी डालकर सिंचाई करना एक आम लेकिन प्रभावी तरीका है। पानी की हल्की धार पुराने मैल को ढीला कर बाहर निकालने में मदद करती है। ध्यान रहे कि पानी बहुत गर्म न हो और यह प्रक्रिया केवल उन्हीं लोगों द्वारा की जाए जिनके कान में कोई संक्रमण, छेद या दर्द न हो। किसी भी असहजता की स्थिति में तुरंत प्रक्रिया रोक देना चाहिए।
2. ऑलिव ऑयल या मिनरल ऑयल का उपयोग
कई ईएनटी विशेषज्ञ कान के मैल को मुलायम करने के लिए रात में कुछ बूंदें ऑलिव ऑयल या मिनरल ऑयल डालने की सलाह देते हैं। इससे कठोर मैल धीरे-धीरे पिघलकर बाहर आने लगता है। यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, लेकिन तेल डालते समय ड्रॉपर को कान में गहराई तक न ले जाएँ।
3. इयर ड्रॉप्स का प्रयोग
बाज़ार में कई प्रकार के ईयर वैक्स सॉफ़्टनर उपलब्ध हैं। इनमें मौजूद कार्बामाइड पेरोक्साइड जैसे तत्व मैल को तोड़कर बाहर निकालने में मदद करते हैं। हालांकि इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही उपयोग करना चाहिए ताकि किसी तरह की एलर्जी या प्रतिक्रिया से बचा जा सके।
4. भाप लेना
नाक-कान-गला आपस में जुड़े होते हैं। इसलिए भाप लेने से कानों में जमा कठोर मैल भी ढीला पड़ सकता है। गर्म भाप से नमी मिलती है और वैक्स नरम होकर स्वयं बाहर की ओर आने लगता है। यह तरीका बिल्कुल सरल और घर पर आसानी से अपनाया जा सकता है।
5. डॉक्टरी सहायता लेना
यदि कई दिनों तक राहत न मिले या कान में लगातार दर्द, बजना (टिनिटस), बहाव अथवा चक्कर जैसे लक्षण दिखें, तो घर पर उपाय करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से जाँच करानी चाहिए। चिकित्सक विशेष उपकरणों की मदद से सुरक्षित रूप से मैल निकालते हैं, जिससे किसी भी तरह की चोट या संक्रमण का जोखिम नहीं रहता।
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