देश में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अनियमित खानपान, जंक फूड, मीठे पेय और कम जीवनशैली गतिविधियों के कारण लिवर में फैट जमा होने लगता है, जो आगे चलकर गंभीर बीमारियों का रूप ले सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआती चरण में यदि भोजन और जीवनशैली में सही बदलाव किए जाएं, तो फैटी लिवर को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान होता है।
इन्हीं प्राकृतिक उपायों में एक है — हरे पत्तों का जूस, खासतौर पर कोरियंडर (धनिया), पुदीना और गेहूं के जवारे (Wheatgrass) का रस। माना जाता है कि ये पत्तेदार जूस लिवर की सफाई करने में सहायता करते हैं और शरीर से विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
धनिया का जूस क्यों माना जाता है लिवर-फ्रेंडली?
धनिया में विटामिन C, विटामिन A, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
यह लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को तोड़ने में सहायक माना जाता है।
खून में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।
पाचन सुधारता है और ब्लड शुगर को भी बेहतर संतुलित रखता है।
कई पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि सुबह खाली पेट धनिया का ताजा रस पिया जाए, तो यह लिवर की कार्यक्षमता को बेहतर करने में मददगार सिद्ध हो सकता है।
गेहूं के जवारे (Wheatgrass) का जूस: प्राकृतिक डिटॉक्स ड्रिंक
गेहूं के जवारे को सुपरफूड माना जाता है। इसमें क्लोरोफिल, अमीनो एसिड, एंजाइम और विटामिन K तथा मैग्नीशियम जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं।
यह लिवर पर जमा फैट को कम करने में सहायक माना जाता है।
शरीर के टॉक्सिन्स को तेजी से बाहर निकालने का काम करता है।
मेटाबॉलिज़्म को तेज करता है और पाचन सुधारता है।
वहीं इसका नियमित सेवन त्वचा, ब्लड सर्कुलेशन और इम्युनिटी पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है।
पुदीने का जूस—लिवर को ठंडक और सफाई का डबल फायदा
पुदीने की पत्तियों में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण लिवर की सूजन कम करने में सहायक माने जाते हैं।
यह पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।
लिवर को हल्का और सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।
इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व फैटी लिवर के शुरुआती चरण में लाभकारी हो सकते हैं।
कैसे बनाएं यह हरा जूस?
एक मुट्ठी धनिया, थोड़ा पुदीना और चाहें तो 1–2 चम्मच गेहूं के जवारे का रस मिलाएं।
इसमें आधा गिलास पानी डालकर ताजा जूस तैयार करें।
हल्का नींबू या काला नमक मिलाकर स्वाद और प्रभाव दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।
सुबह खाली पेट इसका सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है।
कितने दिनों में मिल सकता है फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जूस को नियमित रूप से 10–15 दिनों तक लिया जाए और इसके साथ भोजन हल्का तथा कम तेल वाला रखा जाए, तो शरीर में हल्कापन, पाचन में सुधार और लिवर एंजाइमों में बेहतर बदलाव महसूस होने लगते हैं।
हालांकि फैटी लिवर का स्तर कम होने में कुछ सप्ताह से लेकर कुछ महीनों तक लग सकते हैं।
कब सावधानी जरूरी?
गर्भवती महिलाएं
किडनी रोगी
जिनकी शुगर बहुत अधिक अनियंत्रित हो
या जिन्हें पत्तेदार सब्जियों से एलर्जी हो
इन लोगों को सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
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