धर्मशाला (कांगड़ा जिले) के सरकारी डिग्री कॉलेज की 19 साल की दलित छात्रा की **26 दिसंबर, 2025** को लुधियाना में इलाज के दौरान मौत हो गई, आरोप है कि रैगिंग, शारीरिक हमले और यौन उत्पीड़न से हुए गंभीर मानसिक आघात के कारण ऐसा हुआ।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री **सुखविंदर सिंह सुक्खू** ने दुख जताया और 3-4 जनवरी, 2026 को पीड़ित परिवार से सीधे बात की, उन्हें पूरे सरकारी सहयोग और पारदर्शी, समयबद्ध जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर जोर देते हुए कहा कि सरकार परिवार के साथ खड़ी है।
राज्य सरकार ने 3 जनवरी को विभागीय जांच लंबित रहने तक **असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) अशोक कुमार/शर्मा** को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। सस्पेंशन के दौरान उनका मुख्यालय शिमला में उच्च शिक्षा निदेशालय में रहेगा, और उन्हें बाहर जाने के लिए पहले से अनुमति लेनी होगी।
पुलिस ने 1 जनवरी को प्रोफेसर के खिलाफ (यौन उत्पीड़न के लिए धारा 75 BNS के तहत) और तीन छात्राओं के खिलाफ (जानबूझकर चोट पहुंचाने और सामान्य इरादे के लिए धारा 115(2), 3(5) BNS के तहत, साथ ही हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 की धारा 3 के तहत) FIR दर्ज की।
पीड़िता के पिता ने 18 सितंबर, 2025 को सीनियर्स द्वारा हमले और प्रोफेसर द्वारा अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया, जिससे उसकी तबीयत खराब हो गई। छात्रा का एक वीडियो बयान सामने आया, जिसमें उत्पीड़न का विवरण दिया गया था।
UGC ने पांच सदस्यीय तथ्य-खोज समिति का गठन किया, जबकि राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पांच दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की। राज्य आयोग भी रिपोर्ट मांग रहे हैं।
प्रोफेसर ने आरोपों से इनकार किया है और अग्रिम जमानत हासिल कर ली है।
यह मामला कैंपस सुरक्षा चिंताओं को उजागर करता है, जिससे रैगिंग विरोधी उपायों और उत्पीड़न की रोकथाम की जांच शुरू हुई है।
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