संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अब अपनी सिविल सेवा परीक्षाओं को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। UPSC ने बायोमेट्रिक पहचान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी व्यवस्था को अनिवार्य करने का फैसला किया है। यह नई व्यवस्था वर्ष 2024 से ही लागू कर दी जाएगी।
🔍 क्यों लिया गया ये फैसला?
यह फैसला पूर्व आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेडकर मामले के सामने आने के बाद लिया गया है। पूजा पर फर्जी पहचान और अनियमित प्रयासों से UPSC परीक्षा देने के आरोप लगे थे। उन्होंने अपने और अपने माता-पिता के नाम से अलग-अलग प्रयासों से परीक्षा दी थी, जिससे नियमों का उल्लंघन हुआ। इस कारण उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
UPSC ने इस मामले के बाद वर्ष 2009 से 2023 तक 15,000 से ज्यादा अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की जांच की और नकल/जालसाजी की आशंका को देखते हुए सख्त उपायों पर काम शुरू किया।
📅 जून 2024 से लागू होंगी ये नई व्यवस्थाएं
हालांकि 25 मई 2025 को आयोजित होने वाली सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में ये बदलाव लागू नहीं होंगे, लेकिन इसके बाद से यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से सभी UPSC परीक्षाओं में लागू की जाएगी।
🧠 नई व्यवस्था में क्या-क्या होगा?
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: परीक्षा केंद्र पर फिंगरप्रिंट और फेस रिकॉग्निशन से पहचान होगी।
AI निगरानी: पूरे परीक्षा केंद्र पर AI आधारित CCTV से निगरानी की जाएगी।
QR कोड स्कैनिंग: ई-एडमिट कार्ड पर छपे QR कोड को स्कैन किया जाएगा।
नकल और डुप्लिकेट एंट्री रोकने की मजबूत व्यवस्था तैयार की गई है।
✍️ किन परीक्षाओं पर होगा असर?
यह नई व्यवस्था सिर्फ IAS, IPS जैसी सिविल सर्विस परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगी। यह NDA, IFS, CAPF, CDS और अन्य ग्रुप-A और B पदों की UPSC परीक्षाओं में भी लागू होगी।
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