तेज़ी से बदलती जीवनशैली और फिटनेस को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच हाई-प्रोटीन डाइट का चलन लगातार बढ़ रहा है। वजन घटाने से लेकर मसल्स बनाने तक, हर लक्ष्य में प्रोटीन को अहम माना जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक प्रोटीन का सेवन कई बार यूरिक एसिड के स्तर में बढ़ोतरी की वजह भी बन सकता है। जब शरीर प्रोटीन और प्यूरीन को अधिक मात्रा में तोड़ता है, तो इसके परिणामस्वरूप यूरिक एसिड बनता है। अगर यह मात्रा शरीर की आवश्यक सीमा से अधिक हो जाए, तो गुर्दों पर दबाव बढ़ता है और यूरिक एसिड रक्त में जमा होने लगता है।
कैसे बढ़ता है यूरिक एसिड?
आमतौर पर यूरिक एसिड शरीर के मेटाबॉलिज़्म का प्राकृतिक उपोत्पाद है, जिसे गुर्दे फ़िल्टर कर बाहर निकाल देते हैं। लेकिन जब अधिक मात्रा में प्रोटीन, खासकर नॉन-वेज, समुद्री भोजन, रेड मीट या प्रोटीन सप्लीमेंट्स लिए जाते हैं, तो शरीर में प्यूरीन की मात्रा बढ़ जाती है। यह प्यूरीन टूटकर यूरिक एसिड बनाता है। यदि गुर्दे इसे समय पर बाहर न निकाल सकें, तो यह शरीर में जमा होने लगता है और समस्या का कारण बनता है।
क्या हर किसी में बढ़ेगा यूरिक एसिड?
चिकित्सकों के अनुसार, ऐसा ज़रूरी नहीं कि हर व्यक्ति में अधिक प्रोटीन लेने पर यूरिक एसिड बढ़ जाए। लेकिन जिन्हें पहले से किडनी संबंधी समस्या, मोटापा, डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर है, या जिनके परिवार में गाउट का इतिहास रहा है, उनमें इसका खतरा अधिक रहता है। ऐसे लोगों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
यूरिक एसिड बढ़ने के पाँच प्रमुख लक्षण
1. जोड़ों में अचानक दर्द
यूरिक एसिड बढ़ने का सबसे आम संकेत जोड़ों में तेज़ दर्द है। खास तौर पर पैर के बड़े अंगूठे में एकाएक असहनीय दर्द शुरू हो सकता है। यह गाउट का प्रमुख लक्षण माना जाता है।
2. जोड़ों में सूजन और लालिमा
यदि यूरिक एसिड बढ़ा हुआ हो, तो जोड़ों में सूजन आने लगती है। प्रभावित जगह पर हल्की लालिमा और जलन भी महसूस हो सकती है।
3. सुबह stiffness का महसूस होना
कई लोगों को सुबह उठते ही जोड़ों में अकड़न महसूस होती है। यह संकेत हो सकता है कि यूरिक एसिड बढ़कर जोड़ों में क्रिस्टल जमा कर रहा है।
4. बार-बार थकान होना
शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने पर ऊर्जा स्तर पर भी असर पड़ता है। लगातार थकान या भारीपन महसूस होना इसका संकेत हो सकता है।
5. पेशाब में जलन या बदलाव
कई बार यूरिक एसिड बढ़ने से पेशाब का रंग गहरा हो जाता है या पेशाब करते समय हल्की जलन हो सकती है। कुछ मामलों में किडनी स्टोन बनने का खतरा भी बढ़ जाता है।
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