2 मार्च, 2025 को भारत का पहला महिला वनडे विश्व कप जीतने से कुछ घंटे पहले, कप्तान हरमनप्रीत कौर को सचिन तेंदुलकर का देर रात कॉल आया—वही खिलाड़ी जिसने 2011 में अपने खिताब के लिए 19 साल इंतज़ार किया—जिसमें उन्होंने टीम से डीवाई पाटिल स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में “खेल धीमा करो” का आग्रह किया। “जब खेल तेज़ होता है, तो आप लड़खड़ा जाते हैं। इसे नियंत्रित करो। तुम्हारा पल आएगा,” सचिन ने 36 वर्षीय कप्तान से कहा।
भारत ने ये कमाल किया: दीप्ति शर्मा के 5/38, स्मृति मंधाना के 117, और हरमनप्रीत द्वारा नादिन डी क्लार्क का खिताब जीतने वाला कैच लेकर 32,000 दर्शकों के सामने 52 रनों से जीत पक्की कर दी।
आँसुओं से जीत तक
इस जीत ने 49 साल का सूखा खत्म किया—कपिल (1983), धोनी (2007, 2011), और अब हरमनप्रीत (2025)। वह सभी प्रारूपों में विश्व कप जीतने वाली टीम की कप्तानी करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। “मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है। हम एक-दूसरे को ‘विश्व चैंपियन’ कहते रहते हैं,” हरमनप्रीत ने *द आईसीसी रिव्यू* को बताया। “अपने माता-पिता के साथ ट्रॉफी उठाना… उन्होंने मुझे बचपन से ही इसका सपना देखते सुना है।”
लंबा इंतज़ार खत्म
– सचिन: 6 विश्व कप (1992-2011)
– हरमनप्रीत: 2009 में पदार्पण → 2025 का फ़ाइनल
– भारतीय महिला टीम: इस गौरव से पहले 7 फ़ाइनल हारे
विरासत और भावनाएँ
फ़ॉर्म और रणनीति को लेकर पिछली आलोचनाओं के बावजूद, हरमनप्रीत ने संदेह करने वालों को चुप करा दिया। कोच अमोल मजूमदार ने स्वीकार किया: *“यह एक द्विपक्षीय जीत जैसा लग रहा है—असली असर महीनों बाद पता चलेगा।”*
आगे क्या?
– 10 नवंबर को मुंबई में विजय परेड
– 25 करोड़ रुपये बीसीसीआई पुरस्कार
– क्षेत्रीय अनुबंध में 40% की वृद्धि
– डब्ल्यूपीएल 2026 में 6 टीमें शामिल होंगी
सारांश: सचिन की बुद्धिमत्ता, हरमनप्रीत के धैर्य और दीप्ति के जादू ने इतिहास रच दिया। भारतीय महिला क्रिकेट अब “उपविजेता” की कहानी नहीं रही—यह विश्व चैंपियन का युग है। तिरंगा सबसे ऊँचा लहरा रहा है।
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