डिजिटल धोखाधड़ी पर सरकार का वार: SIM बदला तो WhatsApp भी बंद

देश में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने साइबर सुरक्षा मानकों को और सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित दिशानिर्देशों में ऐसे प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिनमें मोबाइल फोन से SIM कार्ड हटाए जाने पर कुछ संवेदनशील ऐप्स—विशेषकर मैसेजिंग और डिजिटल भुगतान सेवाएँ—स्वचालित रूप से निष्क्रिय हो जाएँगी। इसका उद्देश्य किसी भी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा फोन का दुरुपयोग रोकना है।

डिजिटल लेन-देन, UPI भुगतान, ओटीपी आधारित सत्यापन और मैसेजिंग ऐप्स देशभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसके साथ ही SIM स्वैपिंग, फर्जी SIM कार्ड, और डेटा चोरी जैसे अपराध भी बढ़े हैं। साइबर सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कई मामलों में अपराधी फोन का SIM निकालकर डिवाइस का क्लोन बनाते हैं या उसी नंबर का दुरुपयोग करके संवेदनशील खातों तक पहुंच बना लेते हैं। इस खतरे को कम करने के लिए सरकार “रीयल-टाइम SIM–डिवाइस लिंकिंग” जैसे नए सुरक्षा मॉडल पर विचार कर रही है।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि SIM कार्ड हटाया जाता है या अचानक बदल दिया जाता है, तो WhatsApp, Signal, बैंकिंग ऐप्स और डिजिटल वॉलेट जैसी सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ऐप केवल उस मोबाइल नंबर के साथ ही सक्रिय रहे, जिसकी पहचान सरकारी KYC रिकॉर्ड में दर्ज है। यह कदम विशेषतः उन मामलों को रोकने में मदद कर सकता है, जहां फोन चोरी होने पर अपराधी SIM बदलकर खाते को सक्रिय रखने की कोशिश करते हैं।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम डिजिटल सुरक्षा को एक नया मानक प्रदान कर सकता है। उनके अनुसार, SIM कार्ड मोबाइल पहचान का एक प्रमुख स्तंभ होता है। जब तक SIM और डिवाइस दोनों की पहचान आपस में जुड़ी न हो, तब तक किसी भी ऐप की सुरक्षा को 100% नहीं माना जा सकता। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि नए नियम लागू होने पर उपयोगकर्ताओं को बार-बार वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

दूरसंचार विभाग (DoT) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने हाल में साइबर सुरक्षा पर कड़े मानकों का संकेत दिया है। फिलहाल यह नियम मसौदा चरण में हैं और अंतिम स्वरूप जारी होने में समय लग सकता है। मंत्रालय का स्पष्ट मत है कि नागरिकों की गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोई भी निर्णय व्यापक परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।

उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि यदि यह प्रावधान लागू किया जाता है, तो यह SIM धोखाधड़ी पर काफी हद तक रोक लगा सकता है। लेकिन इसके साथ उपयोगकर्ताओं को भी डिजिटल स्वच्छता अपनानी होगी—जैसे ऐप लॉक, स्क्रीन लॉक, और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को सक्रिय रखना।

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