जनता दल (यूनाइटेड) के तेजतर्रार नेता और गोगरी से विधायक गोपाल मंडल इन दिनों सियासी सुर्खियों में हैं। पार्टी ने उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में टिकट नहीं दिया, और इसके बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर तीखे आरोप लगाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है।
“JDU की दूषित मानसिकता ने किया अपमान”
मीडिया से बातचीत में गोपाल मंडल ने कहा:
“मैंने हमेशा पार्टी के लिए ईमानदारी से काम किया। जनता के बीच रहा, हर मुश्किल में लोगों के साथ खड़ा रहा। लेकिन आज पार्टी ने मुझे अपमानित किया है। JDU की दूषित मानसिकता के चलते मेरा टिकट काटा गया।”
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लिए बिना कहा कि पार्टी अब जमीन से जुड़े नेताओं की कद्र नहीं करती।
बगावती तेवर में गोपाल मंडल
गोपाल मंडल ने यह भी साफ किया कि वे अब पीछे हटने वालों में से नहीं हैं।
“मैं अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरूंगा। जनता का आशीर्वाद मेरे साथ है और मैं दिखा दूंगा कि असली ताकत किसके पास है।”
उनके इस बयान के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
क्या JDU को होगा नुकसान?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोपाल मंडल का गोगरी क्षेत्र में अच्छा खासा जनाधार है। ऐसे में अगर वे निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं, तो यह JDU के लिए सियासी घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
अंदरूनी कलह या रणनीति?
पार्टी ने गोपाल मंडल की जगह किसी नए चेहरे को मौका दिया है। इसे JDU की छवि सुधारने और अनुशासन कायम रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इससे पार्टी के भीतर असंतोष भी झलकता है।
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