सर्दियों के मौसम में मूली भारतीय रसोई की एक आम लेकिन बेहद उपयोगी सब्ज़ी मानी जाती है। सलाद से लेकर सब्ज़ी और पराठे तक, मूली कई रूपों में खाई जाती है। हालांकि, बाज़ार में सफेद और लाल—दो तरह की मूली आसानी से मिल जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि सफेद मूली ज़्यादा फायदेमंद है या लाल मूली?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों ही प्रकार की मूली सेहत के लिए लाभकारी हैं, लेकिन इनके पोषक तत्वों और फायदे थोड़े अलग हैं। सही चुनाव आपकी सेहत की ज़रूरत और स्वाद की पसंद पर निर्भर करता है।
सफेद मूली भारत में सबसे ज़्यादा खाई जाने वाली किस्म है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है। सफेद मूली में विटामिन C, फाइबर, पोटैशियम और कुछ मात्रा में फोलेट पाया जाता है। यह पाचन तंत्र के लिए विशेष रूप से फायदेमंद मानी जाती है। कब्ज, गैस और अपच की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए सफेद मूली का सेवन राहत दे सकता है। आयुर्वेद में इसे लिवर को साफ करने और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने वाली सब्ज़ी माना गया है।
वहीं लाल मूली अपने आकर्षक रंग के कारण अलग पहचान रखती है। इसमें भी विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है, लेकिन इसकी खासियत है इसमें मौजूद एंथोसाइनिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स, जो इसे लाल रंग देते हैं। ये तत्व शरीर में सूजन कम करने, हृदय स्वास्थ्य सुधारने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। लाल मूली में फाइबर की मात्रा भी अच्छी होती है, जो वजन नियंत्रण में सहायक मानी जाती है।
अगर इम्यूनिटी की बात करें, तो दोनों मूली शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती हैं। हालांकि, एंटीऑक्सीडेंट्स की अधिकता के कारण लाल मूली को थोड़ी बढ़त मिलती है। वहीं पाचन और डिटॉक्स के मामले में सफेद मूली को अधिक असरदार माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मूली का चुनाव करते समय केवल रंग नहीं, बल्कि उसकी ताज़गी पर भी ध्यान देना चाहिए। जो मूली ज़्यादा सख़्त, भारी और बिना दाग-धब्बों की हो, वही खरीदना बेहतर होता है। बहुत ज़्यादा तीखी गंध वाली या नरम मूली ताज़ा नहीं मानी जाती।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि जिन लोगों को थायरॉइड, गैस या संवेदनशील पेट की समस्या हो, उन्हें मूली का सेवन सीमित मात्रा में और दिन के समय करना चाहिए। रात में मूली खाना कुछ लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
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