थायरॉइड एक छोटी सी ग्रंथि है जो गले के सामने हिस्से में होती है और हार्मोन T3 और T4 बनाकर शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर और वजन नियंत्रण को प्रभावित करती है। जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो या तो हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन की कमी) या हाइपरथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन की अधिकता) हो सकता है। इन स्थितियों में सिर्फ दवाएं ही नहीं, संतुलित और जागरूक डाइट भी बेहद जरूरी हो जाती है।
थायरॉइड मरीजों को क्या खाना चाहिए?
आयोडीन युक्त भोजन – आयोडीन थायरॉइड हार्मोन के निर्माण के लिए जरूरी है। आयोडीनयुक्त नमक, समुद्री भोजन, दही, अंडे, और दूध जैसे खाद्य पदार्थ फायदेमंद होते हैं।
सेलेनियम युक्त खाद्य पदार्थ – यह तत्व थायरॉइड को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है। ब्राज़ील नट्स, सूरजमुखी के बीज, मछली और साबुत अनाज से सेलेनियम मिलता है।
जिंक युक्त चीज़ें – जिंक की पर्याप्त मात्रा से थायरॉइड फंक्शन बेहतर होता है। कद्दू के बीज, चिकन, अंडे और दालें शामिल करें।
फाइबर रिच फूड – सब्ज़ियां, फल, ओट्स और साबुत अनाज पाचन को ठीक रखते हैं और वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
किन चीजों से बचना चाहिए?
गोइट्रोजेनिक फूड्स – पत्ता गोभी, ब्रोकली, मूली, शलजम जैसी सब्ज़ियां कच्चे रूप में थायरॉइड फंक्शन को बाधित कर सकती हैं। इन्हें पकाकर खाया जा सकता है।
बहुत अधिक प्रोसेस्ड फूड और शुगर – ये मेटाबॉलिज्म को धीमा करते हैं और वजन बढ़ाते हैं।
कैफीन का अधिक सेवन – चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स की अधिकता थायरॉइड दवाओं के असर को कम कर सकती है।
सोया और सोया प्रोडक्ट्स – हाइपोथायरॉइड में सोया का अत्यधिक सेवन हार्मोन के अवशोषण में बाधा डाल सकता है।
एक्सपर्ट की सलाह
डॉ. के मुताबिक, “थायरॉइड रोगी अपनी दवा सुबह खाली पेट लें और उसके बाद 30-45 मिनट तक कुछ न खाएं। साथ ही, डाइट में आयोडीन और सेलेनियम की संतुलित मात्रा बनाए रखें और वजन को कंट्रोल में रखें।”
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