बॉलीवुड में अक्सर हीरो को ही चमकता हुआ देखा जाता है, लेकिन कुछ मौकों पर विलेन भी अपनी छवि और अभिनय के दम पर दर्शकों के दिलों में जगह बना लेते हैं। ऐसा ही हुआ 11 साल पहले जब रितेश देशमुख ने अपने करियर में विलेन की भूमिका निभाई और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों का बिज़नेस किया।
उस समय रितेश की छवि आम तौर पर कॉमिक और रोमांटिक हीरो के रूप में रही थी। लेकिन इस फिल्म में उन्होंने एक खूंखार और जटिल विलेन की भूमिका निभाकर दर्शकों को चौंका दिया। उनकी भूमिका इतनी दमदार थी कि पुराने दौर के धुरंधर खलनायक जैसे रहमान डकैत भी फीके लगने लगे।
फिल्म की कहानी और स्क्रिप्ट ने रितेश की प्रतिभा को पूरी तरह से उभारा। दर्शकों को उनकी भयंकर लेकिन आकर्षक विलेन वाली छवि पसंद आई। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने जबरदस्त सफलता हासिल की और कई रिकॉर्ड भी तोड़े। इस भूमिका के लिए रितेश को व्यापक आलोचनात्मक सराहना भी मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फिल्म ने रितेश के करियर को नई दिशा दी। जहां पहले वे आम तौर पर हल्की-फुल्की भूमिकाओं में देखे जाते थे, वहीं इस फिल्म के बाद उन्हें गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के लिए भी जाना जाने लगा। उनकी विलेन वाली भूमिका ने यह साबित किया कि अगर किरदार सही हो और अभिनय दमदार हो, तो दर्शक किसी भी रूप में अभिनेता को स्वीकार कर सकते हैं।
फिल्म में दर्शाए गए रितेश के किरदार ने केवल दर्शकों को मनोरंजन नहीं दिया, बल्कि एक नए प्रकार के खलनायक का परिचय भी करवाया। उनकी चालाकी, रणनीति और क्रूरता ने फिल्म को रोमांचक बना दिया। यही वजह थी कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों की कमाई की और रितेश देशमुख की छवि को एक नई पहचान दी।
बॉलीवुड के समीक्षक आज भी इस फिल्म और रितेश की भूमिका की चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा कि रितेश ने उस दौर में विलेन की परिभाषा को बदल दिया। यह साबित कर दिया कि नायक और खलनायक की सीमा केवल पटल पर है, और वास्तविक अभिनय प्रतिभा किसी भी किरदार में दमखम दिखा सकती है।
रितेश की यह विलेन वाली भूमिका न केवल उनके करियर के लिए मील का पत्थर बनी, बल्कि यह दर्शाती है कि बॉलीवुड में समय-समय पर ऐसे कलाकार भी आते हैं, जो सपने और चुनौती दोनों को साथ लेकर चलते हैं। आज भी जब लोग पुराने बॉलीवुड फिल्मों की चर्चा करते हैं, तो रितेश देशमुख का यह विलेन वाला अवतार यादगार और चर्चित माना जाता है।
इस फिल्म की सफलता और रितेश की अदाकारी ने साबित कर दिया कि कभी-कभी विलेन ही हीरो से भी ज्यादा याद रह जाता है, और रितेश ने इसे 11 साल पहले ही सिद्ध कर दिया था।
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