आज की तेज़-तर्रार जीवनशैली और असंतुलित आहार के कारण किडनी की बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। अक्सर लोग शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक पहचान और समय पर इलाज ही किडनी को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।
1. किडनी की बीमारी के शुरुआती संकेत
किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद करती है, और शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के और सामान्य समझ में आने वाले होते हैं। कुछ मुख्य संकेत हैं:
पेशाब में झाग या फोम बनना: यह प्रोटीन यूरिया में निकलने का संकेत हो सकता है।
बार-बार पेशाब आना: दिन और रात में बार-बार पेशाब का आना किडनी की समस्या का लक्षण हो सकता है।
सांस फूलना और थकान: किडनी सही से काम नहीं कर रही तो शरीर में टॉक्सिन जमा हो जाते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत और कमजोरी महसूस होती है।
सूजन या एडिमा: आंखों के नीचे, पैरों और टखनों में सूजन दिख सकती है।
ब्लड प्रेशर में असामान्य उतार-चढ़ाव: हाई या लो ब्लड प्रेशर किडनी के खराब होने का संकेत हो सकता है।
2. किडनी की बीमारियों के कारण
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर: ये दोनों सबसे आम कारण हैं।
अनियमित जीवनशैली: अधिक नमक, प्रोसेस्ड फूड और कम पानी पीना किडनी को कमजोर करता है।
अनुवांशिक कारण: परिवार में किडनी रोग का इतिहास होने पर जोखिम अधिक रहता है।
कुछ दवाइयाँ और संक्रमण: लंबे समय तक दर्द निवारक दवाइयों का सेवन और यूटीआई जैसी समस्याएँ भी किडनी को प्रभावित कर सकती हैं।
3. सुरक्षा और बचाव के उपाय
पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं: हाइड्रेटेड रहना किडनी के लिए बेहद जरूरी है।
संतुलित आहार: नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें, फल और सब्ज़ियों को प्राथमिकता दें।
नियमित जांच: खून और यूरिन की टेस्टिंग से किडनी की कार्यक्षमता का समय पर पता चलता है।
ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रित रखें: इन पर नियंत्रण से किडनी की सुरक्षा होती है।
4. डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञ कहते हैं कि किडनी की बीमारियों में प्रारंभिक पहचान ही जीवन रक्षक है। यदि पेशाब में बदलाव, थकान, सांस फूलना या सूजन जैसी समस्याएँ दिखें, तो तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट से सलाह लें। समय पर इलाज से किडनी फेल्योर और डायलिसिस की आवश्यकता से बचा जा सकता है।
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