पैरों में सुन्नता और सड़न का अहसास? हो सकती है ये खतरनाक बीमारी

अगर आपको अक्सर पैरों में सुन्नपन, जलन, झनझनाहट या सड़न जैसा अहसास होता है, तो इसे सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज़ न करें। ये संकेत एक गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं जिसे समय पर पहचानना और इलाज करना बहुत ज़रूरी है।

कौन सी हो सकती है बीमारी?

इन लक्षणों का संबंध पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy) या पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (Peripheral Artery Disease – PAD) से हो सकता है। ये दोनों ही स्थितियाँ नसों और रक्त प्रवाह से जुड़ी होती हैं और अगर इन्हें अनदेखा किया जाए तो यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।

1. पेरिफेरल न्यूरोपैथी क्या है?

यह एक स्थिति है जिसमें हाथों या पैरों की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे दर्द, सुन्नपन, झनझनाहट या जलन महसूस होती है।

संभावित कारण:

  • डायबिटीज (सबसे आम कारण)
  • विटामिन B12 की कमी
  • थायरॉयड की गड़बड़ी
  • शराब का अत्यधिक सेवन
  • संक्रमण या आटोइम्यून रोग

प्रमुख लक्षण:

  • पैरों में झनझनाहट या सुई चुभने जैसा अहसास
  • रात के समय दर्द या जलन
  • छूने पर संवेदनशीलता
  • मांसपेशियों में कमजोरी

2. पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) क्या है?

इस स्थिति में पैरों की धमनियों में खून के प्रवाह में रुकावट आ जाती है, जिससे अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती।

प्रमुख कारण:

  • हाई कोलेस्ट्रॉल
  • धूम्रपान
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • डायबिटीज
  • मोटापा

प्रमुख लक्षण:

  • चलते समय पैरों में ऐंठन या दर्द
  • पैरों का ठंडा पड़ जाना
  • त्वचा का रंग बदलना या जख्मों का जल्दी न भरना
  • पैरों में सुन्नता या कमजोरी

कब सतर्क हो जाएं?

  • जब दर्द, सुन्नपन या जलन नियमित रूप से हो
  • यदि पैर छूने पर भी संवेदना न हो
  • जब चलते समय थकान या दर्द महसूस हो
  • अगर पैरों का रंग बदल रहा हो या उनमें गंध आने लगे

बचाव और राहत के उपाय

  1. नियमित ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच कराएं
  2. विटामिन B12 और D की पर्याप्त मात्रा लें
  3. धूम्रपान और शराब से परहेज करें
  4. व्यायाम और योग अपनाएं
  5. सही खानपान रखें – हरी सब्जियां, फल, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार लें
  6. समय-समय पर पैरों की जांच कराएं, खासकर अगर आप डायबिटिक हैं

पैरों में सुन्नता, झनझनाहट या सड़न जैसी समस्याएं शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर गड़बड़ी का संकेत हो सकती हैं। इन्हें मामूली समझकर टालना सही नहीं है। समय रहते डॉक्टर से परामर्श लें और सही इलाज शुरू करें, ताकि भविष्य में होने वाली बड़ी जटिलताओं से बचा जा सके।