27 फरवरी, 2026 को पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर टकराव (काबुल, कंधार, पक्तिया पर ऑपरेशन ग़ज़ाब लिल-हक एयरस्ट्राइक) बढ़ने के बीच, वायरल सोशल मीडिया पोस्ट—खासकर @AFGDefense जैसे तालिबान समर्थक अकाउंट से—दावा किया गया कि अफगान फोर्स ने कंधे से फायर किए जाने वाले MANPADS का इस्तेमाल करके एक PAF जेट को मार गिराया। वीडियो में पाकिस्तानी निशान और सीरियल नंबर (जैसे, 85510 या 85610) वाला जलता हुआ मलबा दिखाया गया है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह F-16 है।
**टोलो न्यूज़** ने (सिक्योरिटी सोर्स का हवाला देते हुए) बताया कि अफगान फोर्स ने एयरस्पेस का उल्लंघन करते हुए एक पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को मार गिराया, लेकिन टाइप नहीं बताया (F-16/JF-17 की पुष्टि नहीं की)। तालिबान के स्पोक्सपर्सन ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने जवाबी कार्रवाई और पोस्ट पर कब्ज़ा करने का ज़िक्र किया, लेकिन जेट गिराने का कोई दावा नहीं किया।
पाकिस्तान ने किसी भी एयरक्राफ्ट के नुकसान से इनकार किया है, और कहा है कि सभी एसेट्स सुरक्षित वापस आ गए हैं, किसी भी लापता पायलट की खबर नहीं है। किसी भी भरोसेमंद इंटरनेशनल आउटलेट (CNN, रॉयटर्स, अल जज़ीरा, BBC) ने जेट गिराए जाने की पुष्टि नहीं की है—सिर्फ़ अफ़गान दावों का हवाला दिया है, जिसमें अलग-अलग कैजुअल्टी नैरेटिव्स (तालिबान: 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए; पाकिस्तान: 133 तालिबान लड़ाके मारे गए) के बीच अंतर है।
**फैक्ट-चेक एलिमेंट्स**:
– वायरल फुटेज में इनकंसिस्टेंट्स दिख रहे हैं (F-16/JF-17 के लिए गलत साइज़/शेप, PAF इन्वेंटरी में मिसमैच्ड सीरियल्स नहीं)।
– एनालिस्ट्स/OSINT ने टेक्निकल इम्पॉसिबिलिटी पर ध्यान दिया: मॉडर्न जेट्स ऊंचाई (20,000–30,000 ft) पर उड़ते हैं; MANPADS सिर्फ़ कम ऊंचाई पर असरदार होते हैं। – क्लिप शायद रीसायकल की गई हैं (पुराने क्रैश, AI से बने, या उनसे अलग—भारत-पाकिस्तान/अफ़गानिस्तान की लड़ाइयों में पहले की झूठी बातों की तरह)।
– कुछ रिपोर्ट्स में इसे साफ़ तौर पर नकली/AI से छेड़छाड़ वाला बताया गया है (इंडिया टुडे, NDTV, डिफेंस मिरर)।
**फ़ैसला**: इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है कि यह गिराया गया है। यह युद्ध के समय का प्रोपेगैंडा है—दोनों पक्ष हौसला बढ़ाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बात करते हैं। पाकिस्तान के F-16 (75–80) बहुत कीमती हैं; JF-17 (150+) बॉर्डर ऑपरेशन के लिए ज़्यादा आम हैं। दावे अभी कन्फ़र्म नहीं हुए हैं; ऑफ़िशियल बयानों पर नज़र रखें।
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