आंखों की समस्या अब सिर्फ बड़े लोगों तक सीमित नहीं रही। विशेषज्ञों की चेतावनी के अनुसार, तीन साल के बच्चे भी मायोपिया यानी नज़दीक की चीज़ें साफ दिखने में परेशानी का शिकार हो रहे हैं। हालिया शोध और चिकित्सकीय निरीक्षण बताते हैं कि बंद कमरों में ज्यादा समय बिताना और मोबाइल, टीवी या टैबलेट जैसी स्क्रीन पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करना इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
मायोपिया क्या है?
मायोपिया या निकटदृष्टि में व्यक्ति दूर की चीज़ों को स्पष्ट नहीं देख पाता। शुरुआती अवस्था में यह केवल थोड़ी धुंधलापन के रूप में महसूस होता है, लेकिन समय के साथ नजर कमजोर होती जाती है। बच्चों में यह समस्या जल्दी पकड़ में न आने पर उनके पढ़ाई और खेल-कूद पर भी असर डाल सकती है।
बच्चों में बढ़ती मायोपिया के कारण:
बंद कमरे में लंबे समय तक खेलना या पढ़ाई करना: धूप और प्राकृतिक रोशनी की कमी आंखों के विकास को प्रभावित करती है।
मोबाइल और टैबलेट स्क्रीन का अधिक उपयोग: गेम या वीडियो देखने से आंखों की मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं।
टीवी या लैपटॉप के बहुत पास बैठना: लगातार नज़दीक की चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करना आंखों को कमजोर करता है।
बाहर खेलने की कमी: प्राकृतिक रोशनी और खुले वातावरण में खेलना आंखों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
पर्याप्त नींद और पोषण की कमी: आंखों के लिए जरूरी विटामिन और मिनरल्स का अभाव भी मायोपिया बढ़ा सकता है।
लक्षण जिन्हें माता-पिता नजरअंदाज न करें:
बच्चे बार-बार चीज़ों को करीब से देखने की कोशिश करें।
टीवी या स्क्रीन पर बहुत पास बैठना।
बार-बार आंखें रगड़ना या झपकियाँ बढ़ जाना।
पढ़ाई या चित्रकला करते समय धुंधलापन महसूस करना।
तेज रोशनी या अंधेरे में आँखें चमकना या जल्दी थकना।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों की आंखों की नियमित जांच बहुत जरूरी है। तीन साल से ऊपर के बच्चों को कम से कम हर छह महीने में ऑप्थल्मोलॉजिस्ट से चेकअप कराना चाहिए। इसके अलावा, स्क्रीन टाइम सीमित करना, रोजाना 1–2 घंटे खुली हवा में खेलना, और संतुलित आहार जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, अंडा और डेयरी प्रोडक्ट्स देना बेहद लाभकारी है।
साथ ही, माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे टीवी या मोबाइल स्क्रीन पर लंबे समय तक सीधे न बैठें और आंखों को समय-समय पर आराम दें। 20-20-20 नियम अपनाना, यानी हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 सेकंड तक 20 फीट दूर किसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करना, भी मददगार साबित होता है।
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