टीबी (Tuberculosis) एक संक्रामक रोग है, जो Mycobacterium tuberculosis नामक बैक्टीरिया से होता है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन हड्डियों, मस्तिष्क, रीढ़ और अन्य अंगों पर भी असर डाल सकता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
टीबी के प्रमुख लक्षण
- लगातार 2 हफ्ते से अधिक खाँसी रहना
- बलगम के साथ खून आना
- सीने में दर्द या भारीपन
- वजन का तेज़ी से कम होना
- भूख कम लगना
- रात में पसीना आना और बुखार
टीबी का आधुनिक इलाज
- DOTS थेरेपी – सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई Directly Observed Treatment Short-course (DOTS) सबसे प्रभावी तरीका है।
- एंटी-टीबी दवाइयाँ – कम से कम 6 से 9 महीने तक नियमित रूप से दवाइयाँ लेना ज़रूरी है।
- पूरा कोर्स करें – बीच में दवा बंद करने से रोग दोबारा हो सकता है और बैक्टीरिया दवा-प्रतिरोधी (Drug resistant) बन सकते हैं।
घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय
ये उपाय दवाइयों के साथ अपनाए जा सकते हैं (दवा का विकल्प नहीं हैं):
- हल्दी वाला दूध – संक्रमण से लड़ने और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
- तुलसी और शहद – फेफड़ों को साफ़ रखने और खाँसी कम करने में असरदार।
- आंवला – Vitamin C से भरपूर, फेफड़ों की सेहत के लिए उत्तम।
- गिलोय का रस – रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
जीवनशैली में बदलाव
- संतुलित और पौष्टिक भोजन करें (दालें, हरी सब्जियाँ, दूध, दही, फल)।
- धूप में समय बिताएँ, Vitamin D फेफड़ों को मज़बूत करता है।
- धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
- योग और प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, कपालभाति) को दिनचर्या में शामिल करें।
टीबी गंभीर बीमारी है, लेकिन सही इलाज, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली से इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। सबसे ज़रूरी है कि मरीज डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का पूरा कोर्स करे और बीच में कभी न छोड़े।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check