बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता से विदाई और यूनुस सरकार के सत्ता में आए अब पूरे 10 महीने हो चुके हैं। इन महीनों में मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की नाकामियां एक-एक कर सामने आई हैं। सबसे बड़ी चिंता का विषय है – चुनाव कब होंगे? जनता का धैर्य अब जवाब देने लगा है और लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दल सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
चुनावी रोडमैप गायब, जनता में नाराज़गी
BNP (बांग्लादेश नेशनल पार्टी) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बुधवार को तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार 10 महीने बीतने के बावजूद चुनावी रोडमैप नहीं दे पाई है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा:
“हमने चुनाव का रोडमैप मांगा था, लेकिन सरकार हर मुद्दे पर बात कर रही है, बस चुनाव छोड़कर। यह टालमटोल अब सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।”
उन्होंने साफ कर दिया कि दिसंबर 2025 तक चुनाव हर हाल में कराए जाएं, यही जनता और विपक्ष की मांग है।
यूनुस ने दी नई तारीख, फिर भी सवाल बरकरार
बढ़ते दबाव के बीच मोहम्मद यूनुस ने घोषणा की है कि वह जून 2026 से एक दिन भी ज्यादा पद पर नहीं रहेंगे। उन्होंने चुनाव के लिए दिसंबर 2025 से जून 2026 के बीच की समयसीमा बताई है।
“सुधार” के नाम पर चुनाव टालने की रणनीति
अब तक यूनुस सरकार का तर्क रहा है कि देश में जरूरी संस्थागत सुधार किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। लेकिन फखरुल इस दलील को नकारते हुए कहते हैं:
“लोकतंत्र में सुधारों की प्रक्रिया कभी भी संसद के चुनाव को नहीं रोकती।”
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अब उस दौर से निकल चुका है जब सत्ता एक तानाशाही के हाथ में थी। अब जनता एक नई संसद चाहती है – ऐसी संसद जो उनकी आवाज बने, उनकी आकांक्षाओं को कानूनों और नीतियों में बदले।
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