“एग फ्रीजिंग ‘इंश्योरेंस’? उपासना के बयान पर मचा बवाल, IVF प्रमोशन का आरोप

साउथ सुपरस्टार राम चरण की पत्नी और अपोलो हॉस्पिटल्स की वाइस चेयरपर्सन उपासना कमिनेनि ने महिलाओं की फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस और फैमिली प्लानिंग पर खुलकर बात की, लेकिन उनका एग फ्रीजिंग को ‘जिंदगी का सबसे बड़ा इंश्योरेंस’ बताने वाला बयान सोशल मीडिया पर विवादों का शिकार हो गया। आईआईटी हैदराबाद के स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए उपासना ने कहा कि युवा महिलाओं को करियर पर फोकस करना चाहिए, शादी और बच्चे अपनी मर्जी से प्लान करें, और एग फ्रीजिंग जैसी तकनीक से बायोलॉजिकल क्लॉक का दबाव कम किया जा सकता है। लेकिन नेटिजंस ने इसे IVF सेंटर्स को प्रमोट करने का प्रयास बताते हुए आलोचना की। एक तरफ जहां कुछ ने इसे महिलाओं के एम्पावरमेंट का पैगाम कहा, वहीं ज्यादातर यूजर्स ने इसे ‘टोन डेफ’ और ‘मिसलीडिंग’ करार दिया। यह विवाद उपासना के परिवार की हेल्थकेयर बैकग्राउंड के कारण और भड़क गया।

उपासना का यह बयान 18 नवंबर को आईआईटी हैदराबाद के एक इवेंट के दौरान आया। उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा, “एग फ्रीजिंग महिलाओं के लिए सबसे बड़ा इंश्योरेंस है। इससे आप अपनी जिंदगी अपने तरीके से प्लान कर सकती हैं – शादी कब करनी है, बच्चे कब पैदा करने हैं, यह सब आपकी मर्जी। 20s में करियर बनाओ, फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट बनो, और फिर फैमिली की चिंता करो।” उपासना ने खुद का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने कैसे बिजनेस और मॉदरहुड को बैलेंस किया। राम चरण से 2012 में शादी के बाद 2023 में बेटी क्लिन कारा का जन्म हुआ, और हाल ही में उन्होंने ट्विंस की प्रेग्नेंसी की खुशखबरी दी। लेकिन इस पर्सनल सक्सेस स्टोरी को नेटिजंस ने ‘प्रिविलेज्ड व्यू’ बता दिया।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं उमड़ीं। एक यूजर ने लिखा, “उपासना जी, आप गोल्डन स्पून में पैदा हुईं, 23 साल की उम्र में शादी कर लीं। अब युवा लड़कियों को एग फ्रीजिंग बेच रही हैं? यह IVF का सॉफ्ट सेलिंग है।” एक अन्य ने कहा, “एग फ्रीजिंग लाखों रुपये का खर्चा, दर्दनाक प्रोसीजर, स्टोरेज चार्जेस – और सक्सेस रेट 100% नहीं। आप जैसी अमीरों के लिए ठीक, लेकिन आम लड़कियां क्या करेंगी?” डॉक्टर्स ने भी कड़ा रुख अपनाया। यूके बेस्ड डॉ. सुनीता सयम्मागारु ने एक्स पर लिखा, “एग फ्रीजिंग कोई इंश्योरेंस नहीं। इंजेक्शंस, डिसअपॉइंटमेंट्स, PTSD – बायोलॉजी करियर टाइमलाइन की परवाह नहीं करती। ज्यादातर युवा महिलाएं एक सेशन का खर्च भी नहीं उठा सकतीं।” एक प्रसिद्ध गायनाकॉलजिस्ट ने कहा, “मैं इन बेबीज को डिलीवर करता हूं, लेकिन फेल्ड साइकिल्स देखकर कपल्स रोते हैं। बिल्स चढ़ते जाते हैं, और सफलता की कोई गारंटी नहीं।”

विवाद की जड़ में उपासना का अपोलो हॉस्पिटल्स से कनेक्शन है। वे डॉ. सी. प्रताप रेड्डी की पोती हैं, जिन्होंने अपोलो की स्थापना की। उपासना अपोलो फाउंडेशन की वाइस चेयरपर्सन हैं और फैमिली हेल्थ प्लान इंश्योरेंस की मैनेजिंग डायरेक्टर। नेटिजंस ने आरोप लगाया कि यह IVF सेंटर्स को प्रमोट करने का तरीका है। एक जर्नलिस्ट ने इसे “मेजर पीआर फेल” कहा, जबकि एक यूजर ने लिखा, “शेमलेस प्रमोशन। मिसकैरेज रिस्क्स को छिपा दिया, बस बिजनेस आइडिया बेच रही हैं।” जोहो के सीईओ श्रीधर वेम्बू ने भी काउंटर दिया – “20s में बच्चे पैदा करो, यह पूर्वजों के प्रति ड्यूटी है। करियर बाद में भी हो सकता है।”

उपासना का इरादा महिलाओं को सशक्त बनाने का था, लेकिन यह बयान प्रिविलेज और रियलिटी के गैप को उजागर कर गया। एग फ्रीजिंग की कॉस्ट इंडिया में 1.5-3 लाख रुपये प्रति साइकिल है, प्लस ईयरली स्टोरेज 20-50 हजार। सक्सेस रेट 30-40% तक गिर जाता है अगर उम्र 35 से ऊपर हो। विशेषज्ञों का कहना है कि सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट्स में रिस्क्स का खुलासा जरूरी है। उपासना ने अभी तक बैकलैश पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उनके इंस्टाग्राम रील्स पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई है।

यह विवाद महिलाओं की फर्टिलिटी चॉइसेज पर बड़ा डिबेट छेड़ रहा है। एक तरफ करियर vs मॉदरहुड का संघर्ष, दूसरी तरफ मेडिकल टेक्नोलॉजी की सीमाएं। राम चरण की अगली फिल्म ‘गेम चेंजर’ रिलीज होने वाली है, लेकिन फिलहाल उपासना ही हेडलाइंस चुरा रही हैं। क्या यह एम्पावरमेंट का मैसेज बनेगा या IVF मार्केटिंग का उदाहरण? समय बताएगा।

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