उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने प्रदेश के सभी जर्जर स्कूल भवनों की स्थिति पर तत्काल प्रभाव से व्यापक समीक्षा शुरू करने का निर्देश दिया है। मंगलवार को जारी एक आदेश में, मंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों की भौतिक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और असुरक्षित भवनों को चिह्नित करने का आदेश दिया। इस कदम का मकसद बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी जवाबदेह होंगे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आइए जानते हैं, इस पहल के पीछे की वजह और इसके प्रभाव।
निर्देशों की पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है। हाल के वर्षों में प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में जर्जर भवनों के कारण दुर्घटनाएं सामने आई हैं, जिसने स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा, “बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। किसी भी जर्जर भवन में पढ़ाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।” उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तत्काल स्कूलों का निरीक्षण करें और तकनीकी समिति के साथ मिलकर असुरक्षित भवनों की पहचान करें।
विभाग ने सभी जिलों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने की योजना बनाई है, जो तकनीकी समिति द्वारा सत्यापित किया जाएगा। इसके लिए एक जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित ऐप भी विकसित किया जा रहा है, जो स्कूलों की स्थिति को ट्रैक करेगा।
जर्जर भवनों पर कार्रवाई
निर्देशों के अनुसार, जिन स्कूल भवनों को तकनीकी समिति असुरक्षित घोषित करेगी, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसे भवनों में कोई शैक्षणिक गतिविधि नहीं होगी। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत, सुरक्षित कक्षाओं, पंचायत भवनों या ग्राम सचिवालयों में पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। अगर किसी भवन को तुरंत ध्वस्त करना संभव नहीं है, तो उसे चारों तरफ से चिह्नित कर ‘प्रवेश निषेध’ और ‘असुरक्षित’ जैसे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। इन भवनों को ईंटों से सील करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों का प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके।
शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया, “पानी का जमाव, मलबा और छतों पर पत्तियों का जमा होना भवनों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए, स्थानीय निकायों जैसे नगर पालिका या ग्राम पंचायतों के माध्यम से नियमित सफाई और जल निकासी सुनिश्चित की जाएगी।”
जिला शिक्षा अधिकारियों की जवाबदेही
मंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारियों को इस प्रक्रिया की पूरी जिम्मेदारी सौंपी है। अगर कोई भवन 15 साल से कम समय में जर्जर घोषित होता है, तो संबंधित निर्माण अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि कई स्कूलों में खराब निर्माण सामग्री का उपयोग और रखरखाव की कमी के कारण भवन समय से पहले जर्जर हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ ने कहा, “कई स्कूलों में संरचनात्मक कमजोरियां बच्चों और शिक्षकों के लिए जोखिम पैदा कर रही हैं। यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे तत्काल संबोधित करना जरूरी है।”
चुनौतियां और समाधान
प्रदेश में हजारों सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। एक आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में उत्तर प्रदेश में कई स्कूल भवन जर्जर पाए गए हैं, लेकिन मरम्मत के लिए आवंटित धनराशि समय पर जारी नहीं हो पाई है। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने आपदा प्रबंधन कोष से 150 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके अलावा, सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए स्कूल विकास समितियों का गठन किया जा रहा है, जिसमें पूर्व छात्र, गणमान्य व्यक्ति और दानदाता शामिल होंगे।
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