फूल हमारे जीवन में खास महत्व रखते हैं। ये न केवल हमारे आस-पास के माहौल को खुशबू से भर देते हैं, बल्कि तनाव कम करने में भी मददगार होते हैं। फूलों की खेती अब किसानों के लिए एक फायदेमंद व्यवसाय बनता जा रहा है। खासकर, नरगिस के फूल (Nargis Flowers) की खेती किसानों को मोटी कमाई का मौका देती है। आइए जानते हैं नरगिस के फूलों की खेती से जुड़ी अहम बातें।
🌼 नरगिस के फूलों की प्रमुख किस्में
नरगिस के फूलों की कई बेहतरीन किस्में पाई जाती हैं, जिनमें फूलों की संख्या 1 से 8 तक हो सकती है। कुछ प्रसिद्ध किस्में हैं:
सर विंस्टन चर्चिल
तहीती बैरट व्हाइट
आइस फोलिस कैलिफोर्निया सन
ब्राइउल गाउन
डच मास्टर
चीयरफुलनेस
टेक्सास सेमी डबल
🌱 कैसे करें नरगिस की खेती?
मिट्टी का चयन: नरगिस की खेती के लिए दोमट या बलुई मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है।
पीएच स्तर: मिट्टी का पीएच 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
जल निकासी: खेत में पानी निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूरी है ताकि जल जमाव न हो।
तापमान: नरगिस की खेती के लिए 11-17 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श होता है।
📅 खेती का सही समय
बुआई का समय: सितंबर से अक्टूबर के बीच बुआई करना सबसे अच्छा होता है।
खाद प्रबंधन: प्रति वर्ग मीटर 10 किग्रा गोबर खाद के साथ 250 किग्रा नाइट्रोजन, 625 किग्रा फॉस्फोरस, और 625 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए।
सिंचाई: बुआई के तुरंत बाद भारी सिंचाई न करें।
✂️ फूलों की हार्वेस्टिंग
कटाई का समय: नरगिस के फूलों को “गूस नेक स्टेज” पर काटा जाता है, यानी जब फूल का आकार हंस की गर्दन जैसा दिखे।
कटाई की विधि: जमीन से 10-15 सेमी ऊपर से फूलों को काटें। गुच्छेदार किस्मों के फूल 2 खिले हुए अवस्था में काटे जाते हैं।
स्टोरेज: फूलों को ताजगी बनाए रखने के लिए पानी भरी बाल्टी में रखा जाता है।
⏳ शेल्फ लाइफ बढ़ाने के तरीके
नरगिस के फूलों की शेल्फ लाइफ सामान्यतः 7-8 दिन होती है।
इन्हें 25 पीपीएम सिल्वर नाइट्रेट और 6-10% शर्करा के घोल में 2-4 घंटे तक रखने से ताजगी लंबे समय तक बनी रहती है।
💰 नरगिस की खेती से कमाई का गणित
प्रति हेक्टेयर करीब 4 लाख कटे हुए फूल और 8 लाख कंद का उत्पादन आसानी से हो जाता है।
नरगिस के फूलों की बाजार में भारी मांग रहती है, जिससे किसान अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं।
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