कई वर्षों से यह सवाल आम लोगों के बीच बना हुआ है कि दूध पीने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है या नहीं। हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस पर नया खुलासा किया है। अध्ययन में पाया गया है कि दूध का सेवन सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण नहीं बनता, लेकिन कुछ संकेत और सावधानियां लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
अध्ययन के अनुसार, दूध में मौजूद सैचुरेटेड फैट उच्च मात्रा में लेने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है, जो लंबे समय में हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि संतुलित मात्रा में दूध पीना हृदय के लिए हानिकारक नहीं है, लेकिन अधिक मात्रा या अधिक फैटी दूध का नियमित सेवन जोखिम बढ़ा सकता है।
डॉ. रेखा सिंह, कार्डियोलॉजिस्ट, बताती हैं, “दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भी हो सकता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी भरपूर मात्रा में होते हैं। हालांकि, हृदय रोग या कोलेस्ट्रॉल की समस्या वाले लोगों को लो-फैट या स्किम्ड दूध का सेवन करना चाहिए।”
अध्ययन में यह भी पाया गया कि दूध पीने वालों में हार्ट अटैक के प्रत्यक्ष मामलों में वृद्धि नहीं हुई। बल्कि, जिन लोगों ने संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ दूध का सेवन किया, उनके हृदय स्वास्थ्य में सुधार देखा गया।
कौन से संकेत हैं खतरनाक:
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दूध पीने के बाद शरीर में कुछ संकेत दिखाई दें, तो सतर्क हो जाना चाहिए:
सीने में दर्द या असहजता – जो सामान्य पेट या गैस की वजह से नहीं हो।
सांस लेने में कठिनाई – विशेषकर अचानक या जोरदार व्यायाम के दौरान।
अनियमित हृदय धड़कन – पल्स रेट असामान्य रूप से तेज या धीमी होना।
लगातार वजन बढ़ना और सूजन – पैरों, टखनों या पेट में।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि दूध को डायट का हिस्सा बनाते समय मात्रा का ध्यान रखें। एक दिन में 1 से 2 गिलास लो-फैट या स्किम्ड दूध पर्याप्त माना जाता है। इसके साथ ही फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन स्रोतों को आहार में शामिल करना हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
अध्ययन के निष्कर्ष से यह स्पष्ट होता है कि दूध पीना स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं, बल्कि इसे संतुलित मात्रा में और सही प्रकार का दूध चुनकर ही स्वास्थ्य लाभ लिया जा सकता है। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, हृदय रोग या कोलेस्ट्रॉल की समस्या वाले व्यक्ति नियमित जांच और आहार पर ध्यान दें।
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