मिट्टी को जहर मत दो, उसे मां समझो – कोयंबटूर में पीएम मोदी का ऐतिहासिक संकल्प

“हमारी मिट्टी ने हमें हजारों साल पाला है, अब हमारी बारी है कि हम उसे बचाएं।” – ये शब्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के थे, जब उन्होंने मंगलवार को तमिलनाडु के कोयंबटूर में देश के सबसे बड़े ‘प्राकृतिक खेती महासम्मेलन’ को संबोधित किया। 60 हजार किसानों के सामने पीएम ने साफ घोषणा की – “अगले दशक में भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती वाला देश बनेगा। यह कोई नया प्रयोग नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन स्वदेशी परंपरा का पुनर्जागरण है।”
पीएम ने भावुक अंदाज में कहा, “हमारे पूर्वज गोबर, गोमूत्र, जीवामृत और देशी बीज से खेती करते थे। रसायन तो विदेशी कंपनियों का हथियार है, जिसने हमारी मिट्टी को जहर दे दिया। अब समय आ गया है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें। प्राकृतिक खेती सिर्फ खेती नहीं, बल्कि संस्कृति, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का आंदोलन है।”
पांच साल में पांच गुना बढ़ोतरी का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:

2014 में देश में सिर्फ 90 हजार हेक्टेयर पर प्राकृतिक खेती हो रही थी।
आज 2025 में यह 42 लाख हेक्टेयर को पार कर चुकी है।
2030 तक इसे 2 करोड़ हेक्टेयर तक ले जाने का संकल्प।

उन्होंने घोषणा की कि अब हर ब्लॉक में एक ‘प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र’ खुलेगा और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को PM-किसान की 6000 रुपये की सहायता के अलावा अतिरिक्त 5000 रुपये ‘मिट्टी रक्षक बोनस’ सीधे खाते में मिलेगा।
कोयंबटूर के किसानों ने दिखाया कमाल
मंच पर मौजूद सलेम के किसान मुरुगन ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी गन्ने की फसल में लागत 55 प्रतिशत घटी और उत्पादन 18 प्रतिशत बढ़ा। उनकी गन्ने की चीनी को विदेशी कंपनियां 40 प्रतिशत ज्यादा दाम दे रही हैं। पीएम ने मुरुगन को गले लगाते हुए कहा, “ये हैं हमारे असली हीरो। इनकी सफलता ही हमारी नीति है।”
तीन बड़े फैसले

सभी कृषि विश्वविद्यालयों में प्राकृतिक खेती को अलग डिपार्टमेंट बनाया जाएगा।
FPO और महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राकृतिक उत्पादों के मार्केटिंग के लिए 100 करोड़ का विशेष फंड।
2026 से हर जिले में एक ‘जीरो केमिकल मंडी’ खुलेगी, जहां सिर्फ प्राकृतिक उत्पाद बिकेंगे।

पीएम ने युवाओं से अपील की, “आज का युवा शहर में जॉब ढूंढ रहा है। मैं कहता हूं – गांव लौटो, प्राकृतिक खेती का स्टार्टअप करो। दुनिया ऑर्गेनिक सब्जी, फल और अनाज के लिए तरस रही है। भारत इसे दे सकता है।”
कोयंबटूर सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पनीरसेल्वम और 12 राज्यों के कृषि मंत्री मौजूद थे। पीएम ने अंत में कहा, “प्राकृतिक खेती से हम तीन लक्ष्य हासिल करेंगे – किसान की आय दोगुनी, मिट्टी का स्वास्थ्य वापस और भारत को विश्व का ऑर्गेनिक फूड बास्केट बनाना।”
सम्मेलन के बाद #NaturalFarmingRevolution ट्रेंड करने लगा। किसानों ने पीएम को ‘मिट्टी पुत्र’ कहकर सम्मानित किया। कोयंबटूर से लौटते हुए पीएम ने ट्वीट किया, “आज तमिलनाडु की धरती ने साबित कर दिया – हमारी मिट्टी में अभी भी वो ताकत है जो दुनिया को खिला सकती है। बस हमें रसायन छोड़ना है और प्रकृति को अपनाना है।”

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