आर्थराइटिस यानी जोड़ों का सूजन या दर्द, अक्सर उम्र बढ़ने के साथ जुड़ा माना जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस रोग के शुरुआती लक्षणों की पहचान समय पर करने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। एम्स और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि आर्थराइटिस केवल बूढ़ों की बीमारी नहीं, बल्कि युवाओं में भी बढ़ रहा है।
आर्थराइटिस के शुरुआती लक्षण:
जोड़ों में हल्का दर्द या अकड़न – सुबह उठने पर या लंबे समय तक बैठे रहने के बाद दर्द महसूस होना।
सुई जैसी चुभन या जलन – कुछ समय तक हल्की सूजन के साथ जोड़ों में गर्मी महसूस होना।
जोड़ों में हल्की सूजन या लालिमा – विशेषकर हाथों, घुटनों और कलाई में सूजन।
गतिविधि में कठिनाई – छोटे काम करते समय भी जोड़ों में असामान्य तनाव या थकान महसूस होना।
जोड़ों की कठोरता – लंबे समय तक आराम करने के बाद भी जोड़ों में लचीलापन कम होना।
क्यों होता है आर्थराइटिस:
जीन और आनुवंशिकी – परिवार में आर्थराइटिस का इतिहास होने पर जोखिम अधिक।
अत्यधिक वजन – अतिरिक्त भार जोड़ों पर दबाव डालता है।
अनहेल्दी लाइफस्टाइल – कम व्यायाम, असंतुलित भोजन और स्ट्रेस भी जोखिम बढ़ाते हैं।
चोट या संक्रमण – चोटिल जोड़ या संक्रमण से भी यह रोग शुरू हो सकता है।
बचाव और रोकथाम:
संतुलित आहार – हरी सब्जियां, फल, ओमेगा-3 युक्त मछली और नट्स जोड़ें।
नियमित व्यायाम – हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और योग जोड़ की लचीलापन बनाए रखते हैं।
वजन नियंत्रण – अतिरिक्त वजन कम करने से घुटनों और हिप्स पर दबाव घटता है।
गर्म और ठंडी सिकाई – दर्द और सूजन को कम करने के लिए।
सप्लीमेंट्स और दवा – डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट्स लें।
डॉक्टरों की चेतावनी:
आर्थराइटिस के शुरुआती लक्षण को नजरअंदाज करना लंबे समय में जोड़ की गतिशीलता कम और स्थायी दर्द का कारण बन सकता है।
समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव से रोग की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।
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