आजकल कई लोगों में यह डर बढ़ गया है कि ब्रेड खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर फैले मिथकों ने इस विषय को और अधिक विवादित बना दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि सच और भ्रम को अलग करना बेहद जरूरी है।
ब्रेड और कैंसर के बीच मिथक:
कुछ अध्ययन और मीडिया रिपोर्ट्स में ब्रेड और अन्य प्रोसेस्ड फूड्स को कैंसर से जोड़कर देखा गया है। इसमें मुख्य रूप से बात उच्च तापमान पर बेक किए गए या टोस्ट किए गए ब्रेड में बनने वाले कुछ रासायनिक पदार्थों की होती है। जैसे कि एक्रिलामाइड, जो अत्यधिक तापमान पर स्टार्चयुक्त फूड्स में बन सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य मात्रा में ब्रेड खाने से कैंसर का खतरा बढ़ने की संभावना बहुत कम है। शरीर पर इसका असर मुख्य रूप से खाने की मात्रा, प्रकार और तैयारी के तरीके पर निर्भर करता है।
ब्रेड का सही चुनाव:
हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि सफेद ब्रेड की बजाय होल ग्रेन या मल्टीग्रेन ब्रेड का सेवन करना बेहतर होता है। होल ग्रेन ब्रेड में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स अधिक होते हैं और यह पाचन स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।
खाने की मात्रा और तरीका:
ब्रेड का सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए। अत्यधिक ब्रेड या प्रोसेस्ड फूड्स खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है, वजन बढ़ सकता है और हृदय स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसे टोस्ट करते समय उच्च तापमान से बचना चाहिए ताकि एक्रिलामाइड बनने की संभावना कम हो।
एक्सपर्ट की सलाह:
संतुलित डाइट अपनाएं: ब्रेड के साथ फल, सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल करें।
प्रोसेस्ड ब्रेड कम खाएं: पैकaged ब्रेड में अक्सर शुगर और प्रिज़र्वेटिव्स अधिक होते हैं।
तोस्ट या बेक करते समय सावधानी: उच्च तापमान पर लंबे समय तक ब्रेड न बेक करें।
होल ग्रेन या मल्टीग्रेन ब्रेड चुनें: यह सेहत के लिए अधिक लाभकारी और फाइबरयुक्त होता है।
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