अक्सर मामूली चोट लगने पर कुछ ही मिनटों में खून अपने-आप रुक जाता है। लेकिन अगर चोट लगते ही खून देर तक बहता रहे या बार-बार ब्लीडिंग हो, तो यह सामान्य बात नहीं है। ऐसी स्थिति में शरीर किसी ब्लीडिंग डिसऑर्डर से जूझ रहा हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
ब्लीडिंग डिसऑर्डर क्या होता है?
ब्लीडिंग डिसऑर्डर वह स्थिति है जिसमें शरीर का खून ठीक से जम नहीं पाता। इसका कारण खून में मौजूद प्लेटलेट्स या क्लॉटिंग फैक्टर की कमी हो सकती है।
ब्लीडिंग डिसऑर्डर के प्रमुख लक्षण
- मामूली चोट पर भी खून देर तक बहना
- नाक या मसूड़ों से बार-बार खून आना
- बिना कारण शरीर पर नीले-काले निशान पड़ना
- कट लगने पर खून का जमने में ज्यादा समय लगना
- महिलाओं में अत्यधिक मासिक रक्तस्राव
- सर्जरी या दांत निकलवाने के बाद ज्यादा ब्लीडिंग
ब्लीडिंग डिसऑर्डर के संभावित कारण
1. आनुवंशिक कारण
कुछ ब्लीडिंग डिसऑर्डर जन्म से होते हैं, जैसे हीमोफीलिया या वॉन विलेब्रांड डिजीज।
2. प्लेटलेट्स की कमी
खून में प्लेटलेट्स कम होने पर ब्लीडिंग जल्दी नहीं रुकती।
3. विटामिन की कमी
विटामिन K की कमी से खून जमने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
4. लीवर से जुड़ी समस्याएं
लीवर सही तरीके से काम न करे तो क्लॉटिंग फैक्टर कम बनते हैं।
5. दवाओं का असर
ब्लड पतला करने वाली दवाएं (जैसे कुछ पेनकिलर या एंटी-कोएगुलेंट) भी ब्लीडिंग बढ़ा सकती हैं।
कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें?
अगर बार-बार बिना वजह ब्लीडिंग हो रही है, चोट के बाद खून रुकने में ज्यादा समय लग रहा है या परिवार में ऐसी बीमारी का इतिहास रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
जांच और इलाज
ब्लीडिंग डिसऑर्डर की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट, प्लेटलेट काउंट और क्लॉटिंग टेस्ट किए जाते हैं। इलाज बीमारी के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है।
चोट लगने पर खून का देर तक बहना शरीर की गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। समय पर पहचान और सही इलाज से इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है, इसलिए ऐसे लक्षण दिखें तो लापरवाही न बरतें।
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