नई माताओं के लिए थायरॉइड की दवाओं के सेवन को लेकर अक्सर चिंता रहती है। डॉक्टरों का कहना है कि हाइपोथायरॉइडिज़्म या हाइपरथायरॉइडिज़्म जैसी स्थितियों में दवाओं को रोकना या गलत मात्रा में लेना दोनों ही जोखिमपूर्ण हो सकते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएं थायरॉइड की दवाएं सुरक्षित रूप से ले सकती हैं।
थायरॉइड और ब्रेस्टफीडिंग का संबंध
थायरॉइड हार्मोन शरीर के मेटाबोलिज्म, ऊर्जा स्तर और हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करता है। महिलाओं में थायरॉइड की कमी या अधिकता से स्तनपान की क्षमता और दूध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि माताओं को अपने थायरॉइड हार्मोन लेवल को नियमित जांचते रहना चाहिए।
डॉक्टरों की राय: कौन सी दवाएं सुरक्षित हैं
थायरोक्सिन (Levothyroxine): यह दवा हाइपोथायरॉइडिज़्म के लिए सबसे सामान्य और सुरक्षित मानी जाती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि यह स्तन के दूध में न्यूनतम मात्रा में पहुंचती है और बच्चे पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं डालती।
थायरॉइड हार्मोन ब्लॉकर: हाइपरथायरॉइडिज़्म के लिए प्रयुक्त दवाएं जैसे मेथिमाज़ोल (Methimazole) या प्रोपाइलथियोयूरासिल (PTU) कुछ हद तक दूध में जा सकती हैं। डॉक्टर कहते हैं कि सही डोज़ और निगरानी में इन्हें इस्तेमाल करना सुरक्षित है, विशेषकर PTU का चयन पहले तीन महीनों में किया जा सकता है।
सुरक्षा के उपाय
डोज़ का पालन: हमेशा डॉक्टर द्वारा निर्धारित मात्रा ही लें।
निगरानी: थायरॉइड स्तर की नियमित जांच कराएं, ताकि माँ और शिशु दोनों सुरक्षित रहें।
बच्चे पर ध्यान: अगर बच्चे में unusual नींद, खून में बदलाव या स्वास्थ्य में असामान्यता दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
दवा बदलने की अनुमति: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद या बदलना खतरनाक हो सकता है।
ब्रेस्टफीडिंग पर दवा का असर
अधिकांश अध्ययन बताते हैं कि सही मात्रा में ली गई थायरॉइड दवाएं शिशु के लिए खतरा नहीं बनती। लेकिन माताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे दवा के समय और दूध के समय का सही तालमेल बनाए रखें, ताकि बच्चे को न्यूनतम एक्सपोज़र हो।
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