रातभर चार्ज पर रखते हैं फोन? हो सकता है बड़ा हादसा — रिपोर्ट में चेतावनी

स्मार्टफोन आज हर किसी की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसके इस्तेमाल में छोटी-छोटी गलतियां बड़े हादसे का कारण बन रही हैं।
देश के कई हिस्सों से मोबाइल फटने या चार्जिंग के दौरान धुआं निकलने की घटनाएं सामने आई हैं।
टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसी दुर्घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण है — चार्जिंग के दौरान फोन का गलत इस्तेमाल।

चार्जिंग के दौरान फोन चलाना कितना खतरनाक है?

अधिकांश लोग फोन चार्ज करते वक्त कॉल उठाते हैं, वीडियो देखते हैं या गेम खेलते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत बैटरी पर डबल लोड डालती है।
चार्जिंग के दौरान फोन में विद्युत धारा (Current) प्रवेश कर रही होती है, जबकि स्क्रीन और प्रोसेसर उसी समय ऊर्जा खर्च कर रहे होते हैं।
यह स्थिति ओवरहीटिंग (Overheating) पैदा करती है, जिससे बैटरी का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और ब्लास्ट या स्पार्क की संभावना बढ़ जाती है।

रातभर फोन चार्ज पर छोड़ना भी गलत

कई लोग रातभर फोन चार्जिंग पर लगाकर सो जाते हैं, ताकि सुबह पूरी बैटरी मिले।
लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि यह आदत बेहद खतरनाक है।
लिथियम-आयन बैटरी 100% चार्ज होने के बाद भी चार्जर से जुड़े रहने पर ओवरवोल्टेज (Overvoltage) का दबाव झेलती है।
यह धीरे-धीरे उसकी केमिकल स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाता है और बैटरी फूल सकती है या लीकेज हो सकता है।
कई मामलों में यही ब्लास्ट का मुख्य कारण साबित हुआ है।

लोकल चार्जर से भी बढ़ता खतरा

सस्ते या नकली चार्जर से चार्जिंग करने पर वोल्टेज फ्लक्चुएशन का खतरा बढ़ता है।
ये चार्जर न तो पर्याप्त सुरक्षा सर्किट प्रदान करते हैं, न ही वोल्टेज कंट्रोल।
इससे फोन के मदरबोर्ड और बैटरी सेल दोनों को नुकसान हो सकता है।
मोबाइल कंपनियाँ हमेशा ओरिजिनल चार्जर और केबल का उपयोग करने की सलाह देती हैं।

सही चार्जिंग के तरीके — एक्सपर्ट्स की सलाह

चार्जिंग के समय फोन का कवर हटा दें, ताकि गर्मी बाहर निकल सके।

फोन को समतल और ठंडी सतह पर रखें, बिस्तर या तकिए पर नहीं।

चार्ज करते समय कॉलिंग या गेमिंग से बचें।

20% पर चार्ज लगाएं और 90% तक पहुंचने पर निकाल दें।

कभी भी भीगे हाथों या पानी के पास चार्जिंग न करें।

अगर फोन अत्यधिक गर्म हो जाए तो तुरंत चार्जर निकाल दें।

ब्लास्ट के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

स्मार्टफोन में तेज़ प्रोसेसर और बड़ी बैटरी की मांग बढ़ने से ऊर्जा घनत्व (Energy Density) भी बढ़ गया है।
अगर वोल्टेज, तापमान या चार्जिंग साइकिल में ज़रा सी गड़बड़ी हो जाए, तो बैटरी के अंदर शॉर्ट सर्किट हो सकता है।
यही स्थिति “ब्लास्ट” या “स्मोकिंग फोन” जैसी घटनाओं का कारण बनती है।

यह भी पढ़ें:

Bigg Boss 19: फैंस की उम्मीदों पर पानी, शॉकिंग एविक्शन में शो से बाहर हुआ यह कंटेस्टेंट