पैरों की दर्द और सूजन को न करें नजरअंदाज, हो सकती है किडनी की समस्या

आज के जीवनशैली और खान-पान के चलते किडनी की समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। अक्सर लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैरों में दर्द या सूजन, अगर अन्य असामान्य लक्षणों के साथ दिखाई दे, तो यह किडनी फेलियर या किडनी की कमजोरी का संकेत हो सकता है।

किडनी हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थ और अतिरिक्त पानी निकालने का काम करती है। जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती, तो शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है। इस वजह से पैरों और टखनों में सूजन, खासकर शाम के समय, आम हो जाती है।

किडनी फेलियर के संकेत जो नजरअंदाज न करें

पैरों और टखनों में सूजन

अधिकतर मरीजों में सुबह या शाम को पैरों में सूजन बढ़ जाती है।

लंबे समय तक खड़े रहने या चलने के बाद सूजन और दर्द बढ़ सकते हैं।

थकान और कमजोरी

किडनी की कार्यक्षमता घटने पर शरीर में टॉक्सिन जमा हो जाते हैं।

इससे थकान, कमजोरी और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत महसूस होती है।

मुंह और आंखों के आसपास सूजन

यह संकेत भी किडनी की समस्या का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

मूत्र संबंधी बदलाव

पेशाब का रंग बदलना, पेशाब का बार-बार आना या कम मात्रा में आना।

झागदार या असामान्य रंग का पेशाब किडनी की समस्या का इशारा हो सकता है।

उच्च रक्तचाप

किडनी और ब्लड प्रेशर का सीधा संबंध है।

लगातार हाई ब्लड प्रेशर होना किडनी फेलियर की वजह बन सकता है।

सीने और पीठ में दर्द

कभी-कभी पैरों के दर्द के साथ पीठ के निचले हिस्से या कमर में भी दर्द महसूस हो सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह

डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती चरण में किडनी की समस्या को पहचानना बेहद जरूरी है। कुछ सामान्य सावधानियाँ और जीवनशैली में बदलाव से स्थिति नियंत्रित की जा सकती है:

नमक का सेवन कम करें: शरीर में पानी और नमक का असंतुलन सूजन बढ़ा सकता है।

पर्याप्त पानी पीएं: तरल पदार्थ का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

नियमित जांच: ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और किडनी फंक्शन टेस्ट समय-समय पर कराएं।

संतुलित आहार: प्रोटीन, सोडियम और पोटैशियम का संतुलन रखें।

धूम्रपान और शराब से परहेज़: ये किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कब डॉक्टर से मिलें?

यदि पैरों में दर्द या सूजन लगातार बढ़ रही हो और ऊपर बताए गए लक्षण भी दिख रहे हों, तो तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से किडनी फेलियर को नियंत्रित किया जा सकता है।

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