पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली के वसंत कुंज स्थित जय हिंद कॉलोनी में रह रहे बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है।
ममता बनर्जी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कॉलोनी में रह रहे सैकड़ों बंगाली परिवारों की पानी और बिजली की आपूर्ति अचानक बंद कर दी गई, जिससे उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है।
पानी-बिजली काटी, मीटर जब्त, टैंकरों को रोका
ममता ने आरोप लगाया कि कॉलोनी में रहने वाले निवासियों की बिजली आपूर्ति कथित तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के इशारे पर रोकी गई। बिजली मीटर जब्त कर लिए गए और पानी की सप्लाई भी काट दी गई।
उन्होंने लिखा कि दिल्ली पुलिस ने आरएएफ के सहयोग से निजी पानी के टैंकरों को भी जबरन रोक दिया, जिन्हें स्थानीय लोगों ने अपने खर्चे पर मंगवाया था।
कोर्ट केस के बावजूद जबरन बेदखली?
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि कॉलोनी से जबरन बेदखली की कार्रवाई की जा रही है, जबकि इस मामले पर अदालत में सुनवाई चल रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब किसी नागरिक को पानी, बिजली और आश्रय जैसे बुनियादी अधिकार नहीं मिलते, तो लोकतंत्र और गणराज्य की भावना कहाँ रह जाती है?
“बांग्ला बोलना जुर्म नहीं”
अपने पोस्ट में ममता बनर्जी ने भाजपा पर बांग्ला-विरोधी एजेंडा फैलाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने लिखा:
“बंगाली बोलने से कोई बांग्लादेशी नहीं हो जाता। ये भी उतने ही भारतीय नागरिक हैं जितने कोई और। देश के अलग-अलग हिस्सों में बंगालियों के साथ घुसपैठियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।”
उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्य प्रदेश से भी ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं, जहां बंगाली प्रवासियों को निशाना बनाया गया है।
ममता का संदेश: “हमारे लोग भारत में ही बेगाने क्यों?”
ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब बंगाल में बांग्ला पहचान को दबाने में विफल रही, तो अब वह अन्य राज्यों में रणनीतिक ढंग से बंगालियों को हाशिये पर डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल अपने राज्य में प्रवासियों का स्वागत करता है, लेकिन अन्य भाजपा-शासित राज्यों में बंगालियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है।
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