ईरान में सुलग रहा असंतोष: 92% लोग खामेनेई से नाराज, राष्ट्रपति रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ईरान के भीतर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ रहा है। देश में जारी असंतोष का स्तर अब उस बिंदु पर पहुंच चुका है, जहां जनता और सत्ता के बीच खाई और गहरी होती जा रही है। हाल ही में सामने आई राष्ट्रपति कार्यालय की आंतरिक रिपोर्ट ने इस स्थिति को और स्पष्ट कर दिया है — रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि करीब 92 प्रतिशत ईरानी नागरिक देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से नाराज हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीते कुछ महीनों में ईरान के अलग-अलग प्रांतों में किए गए सर्वेक्षणों से पता चला है कि आम नागरिकों के बीच न केवल खामेनेई की लोकप्रियता में गिरावट आई है, बल्कि शासन के खिलाफ भरोसा भी तेजी से घटा है। यह असंतोष मुख्यतः आर्थिक संकट, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सामाजिक आज़ादी की कमी को लेकर बढ़ा है।

बढ़ता असंतोष और आर्थिक दबाव

ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और तेल निर्यात में आई गिरावट से जूझ रही है। महंगाई दर 45 प्रतिशत के पार पहुंच चुकी है, जबकि बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है।
कई परिवार बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। युवा वर्ग में यह भावना गहराई से बैठ गई है कि देश की धार्मिक व्यवस्था अब उनकी आकांक्षाओं को नहीं समझ पा रही।

विशेषज्ञों का कहना है कि 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने जनता के भीतर छिपे असंतोष को खुले विद्रोह में बदल दिया। उस आंदोलन को बर्बर तरीके से दबा दिया गया, लेकिन उसका असर आज भी समाज के हर वर्ग में महसूस किया जा रहा है।

सत्ता की प्रतिक्रिया और डर

ईरान की सत्ता ने इस रिपोर्ट को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट सामने आने के बाद राष्ट्रपति कार्यालय और धार्मिक नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ गया है।
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, खामेनेई के करीबी सर्कल ने इस रिपोर्ट को “गुप्त” रखने की कोशिश की थी, ताकि यह अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक न पहुंचे। लेकिन रिपोर्ट लीक होते ही सोशल मीडिया पर खलबली मच गई।

जनता का रुख और भविष्य का संकेत

ईरान में अब एक बड़ा वर्ग राजनीतिक सुधारों और नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है। विश्वविद्यालयों में छात्र आंदोलन फिर से सिर उठा रहे हैं।
महिलाओं के अधिकारों से लेकर धार्मिक नियंत्रण तक, हर मुद्दे पर विरोध तेज हो रहा है। युवा वर्ग सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार खुलकर रख रहा है, भले ही शासन ने डिजिटल सेंसरशिप को और सख्त कर दिया हो।

भारत और अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से मायने

भारत और अन्य एशियाई देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। ईरान न केवल तेल आपूर्ति का अहम केंद्र है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अगर ईरान में अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका असर खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर भी पड़ सकता है।

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