डायबिटीज के मरीजों के लिए रोजाना ब्लड शुगर की जांच एक बड़ी चुनौती होती है। उंगली में सुई चुभोना, खून निकालना और फिर स्ट्रिप पर जांच करना—यह प्रक्रिया न सिर्फ दर्दनाक होती है, बल्कि लंबे समय में असहज भी हो जाती है। अब इसी परेशानी को खत्म करने के लिए मेडिकल टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नई और क्रांतिकारी पहल सामने आई है। वैज्ञानिकों ने ऐसी डिवाइस पर काम किया है, जो सिर्फ सांसों के जरिए ब्लड शुगर लेवल का पता लगाने में सक्षम होगी।
बताया जा रहा है कि यह नई डिवाइस सांस में मौजूद खास रासायनिक तत्वों का विश्लेषण करके शरीर में ग्लूकोज के स्तर का अनुमान लगाती है। दरअसल, जब शरीर में शुगर का स्तर बढ़ता या घटता है, तो उसका असर सांस में निकलने वाले कुछ गैस कंपाउंड्स पर भी पड़ता है। यही तकनीक इस डिवाइस की बुनियाद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज मरीजों की सांस में मौजूद एसीटोन जैसे तत्वों की मात्रा ब्लड शुगर से जुड़ी होती है। नई डिवाइस सेंसर की मदद से इन्हीं तत्वों को पकड़ती है और कुछ ही सेकंड में शुगर लेवल की जानकारी दे देती है। इस प्रक्रिया में न तो सुई की जरूरत होती है और न ही खून निकालना पड़ता है।
इस तकनीक को खासतौर पर उन मरीजों के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है, जिन्हें दिन में कई बार शुगर जांच करनी पड़ती है। बच्चों, बुजुर्गों और सुई से डरने वाले मरीजों के लिए यह डिवाइस किसी वरदान से कम नहीं होगी। साथ ही इससे संक्रमण का खतरा भी काफी हद तक कम हो सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ कर रहे हैं कि यह डिवाइस फिलहाल सहायक तकनीक के तौर पर देखी जा रही है। व्यापक इस्तेमाल से पहले इसकी सटीकता, विश्वसनीयता और लंबी अवधि के परिणामों पर और अध्ययन किए जा रहे हैं। मेडिकल क्षेत्र में किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले कई चरणों की जांच और मंजूरी जरूरी होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो भविष्य में डायबिटीज की जांच का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। इससे न सिर्फ मरीजों की जिंदगी आसान होगी, बल्कि नियमित मॉनिटरिंग भी बेहतर ढंग से हो पाएगी।
यह भी पढ़ें:
धुरंधर का कहर: 32वें दिन भी करोड़ों नोट छापे, ‘इक्कीस’ की हालत पर उठे सवाल
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check