हाल ही में वैलेंटाइन वीक गुजरा, जहां शादीशुदा जोड़े और अडल्ट कपल्स प्यार का इजहार कर रहे थे, वहीं कई 18 साल से कम उम्र के किशोर-किशोरियां भी फूल और गिफ्ट खरीदते दिखे। अब इसी संदर्भ में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी दी है, जिसने लोगों को चौंका दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 18 साल से कम उम्र के युवाओं को प्रेम संबंधों में शामिल होने की आज़ादी मिलनी चाहिए और उन्हें वैधानिक बलात्कार (Statutory Rape) कानूनों के डर में नहीं जीना चाहिए।
क्या कहा दिल्ली हाईकोर्ट ने?
जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने कहा कि किशोरों के बीच सहमति से बने शारीरिक संबंधों को भी अपराध माना जाता है, जो POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) कानून के तहत आता है। जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून को समय के अनुसार विकसित होना चाहिए और किशोरों को रोमांटिक रिश्ते बनाने की आज़ादी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा –
👉 “समाज और कानून दोनों को युवाओं के रोमांटिक रिश्तों को स्वीकार करना चाहिए।”
👉 “यदि ये रिश्ते सहमति से बने हों और किसी भी प्रकार का शोषण या दुर्व्यवहार न हो, तो इन्हें अपराध नहीं माना जाना चाहिए।”
👉 “प्यार एक मूलभूत अनुभव है और किशोरों को भावनात्मक जुड़ाव बनाने का अधिकार है।”
POCSO कानून पर सवाल
POCSO कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति 18 साल से कम उम्र के किशोर के साथ संबंध बनाता है, तो इसे अपराध माना जाता है। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट का कहना है कि कानून को ऐसे मामलों में केवल दुर्व्यवहार और शोषण को रोकने पर ध्यान देना चाहिए, न कि सहमति से बने रिश्तों को अपराध मानना चाहिए।
क्या था पूरा मामला?
यह फैसला एक 2014 के केस से जुड़ा है, जहां एक 12वीं कक्षा की छात्रा अपने 18 साल से ज्यादा उम्र के प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी। उसके पिता ने POCSO के तहत केस दर्ज कराया था।
👉 ट्रायल कोर्ट ने लड़के को सभी आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की।
👉 30 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया और कहा कि लड़की की उम्र को लेकर स्पष्टता नहीं थी।
👉 लड़की ने खुद कहा कि वह सहमति से अपने प्रेमी के साथ गई थी।
👉 कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि लड़की की उम्र 14-15 साल होती, तो मामला अलग होता।
पहले भी हो चुकी है ऐसी राय
दिल्ली हाईकोर्ट ही नहीं, बल्कि देश की अन्य अदालतों ने भी किशोरों के प्रेम संबंधों को अपराध मानने पर चिंता जताई है।
✅ आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (मार्च 2024) – 21 साल के आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि “कोर्ट किशोर प्रेम को नियंत्रित नहीं कर सकती।”
✅ इलाहाबाद हाईकोर्ट (जुलाई 2024) – कहा कि POCSO कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है।
✅ कलकत्ता हाईकोर्ट (अक्टूबर 2023) – कहा कि “16 साल से अधिक उम्र के किशोरों के सहमति से बने संबंधों को अपराध नहीं माना जाना चाहिए।”
✅ मद्रास हाईकोर्ट (2021) – किशोर रिश्तों को स्वीकारने के लिए कानून में बदलाव की जरूरत बताई।
✅ कर्नाटक हाईकोर्ट (फरवरी 2024) – कहा कि “POCSO का मकसद किशोर प्रेम को अपराध बनाना नहीं, बल्कि शोषण से बचाना है।”
क्या बदलेगा कानून?
अब यह देखना होगा कि इस फैसले के बाद सरकार इस कानून में कोई बदलाव करती है या नहीं।
आपकी क्या राय है? क्या 16-17 साल के किशोरों को रोमांटिक रिश्तों की कानूनी आज़ादी मिलनी चाहिए?
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