भारत के रक्षा मंत्री का ऑस्ट्रेलिया दौरा इस समय अंतरराष्ट्रीय राजनीति और रणनीतिक संबंधों के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है। यह दौरा खास इसलिए है क्योंकि मोदी सरकार के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब किसी भारतीय रक्षा मंत्री ने आधिकारिक रूप से ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की है।
दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करना, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक साझेदारी को मजबूती देना, और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को नया रूप देना है।
क्यों अहम है यह दौरा?
भारत और ऑस्ट्रेलिया, दोनों ही देश QUAD समूह (जिसमें अमेरिका और जापान भी शामिल हैं) के सदस्य हैं, और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच यह दौरा रणनीतिक संतुलन बनाने की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि रणनीतिक इरादों और भविष्य की सैन्य साझेदारियों की नींव रखने वाला कदम है।
संभावित एजेंडा क्या है?
इस दौरे में जिन बिंदुओं पर चर्चा हो सकती है, उनमें शामिल हैं:
संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विस्तार: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ‘AUSINDEX’ नामक नौसैनिक अभ्यास पहले से होता रहा है। इस बार इसे और व्यापक रूप देने पर बात हो सकती है।
रक्षा उत्पादन में सहयोग: ऑस्ट्रेलिया भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को लेकर रुचि दिखा सकता है।
इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा: दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने, आतंकवाद-निरोध और साइबर थ्रेट्स पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।
इंडो-पैसिफिक रणनीति: इस क्षेत्र में नौसैनिक निगरानी, संप्रभुता की रक्षा और चीन की आक्रामकता का जवाब देने जैसे मुद्दों पर सामंजस्य की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है करीबी
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। 2020 में दोनों देशों के बीच Mutual Logistics Support Agreement (MLSA) हुआ, जिससे दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का उपयोग कर सकती हैं। इससे आपसी विश्वास और रणनीतिक गहराई में इज़ाफा हुआ है।
चीन पर अप्रत्यक्ष संदेश?
हालांकि यह दौरा किसी एक देश के खिलाफ नहीं है, लेकिन इंडो-पैसिफिक में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिहाज़ से इसे एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही चीन से अपने-अपने स्तर पर असहजता झेल चुके हैं — भारत गलवान संघर्ष और ऑस्ट्रेलिया आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर।
भारत की रक्षा कूटनीति को नया आयाम
रक्षा मंत्री का यह दौरा भारत की “Act East Policy” और “Defence Diplomacy” का विस्तार माना जा रहा है। यह केवल रक्षा समझौते करने की कवायद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की रणनीतिक उपस्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है।
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