नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के 148वें कोर्स की पासिंग आउट परेड 30 मई को एक ऐतिहासिक पल लेकर आने वाली है। पहली बार एनडीए से 17 महिला कैडेट्स ग्रेजुएट होकर थल सेना, वायुसेना और नौसेना में शामिल होंगी। ये कैडेट्स 300 से ज्यादा पुरुष कैडेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर एनडीए से पासआउट होंगी। यह सिर्फ एक पासिंग आउट परेड नहीं, बल्कि भारतीय सेना में समानता और सशक्तिकरण का प्रतीक बनकर उभरेगा।
💬 कैडेट इशिता शर्मा की कहानी: “जेंडर कभी दीवार नहीं बना”
दिल्ली यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स ऑनर्स कर चुकीं डिवीजन कैडेट कैप्टन इशिता शर्मा ने कहा,
“एनडीए में हमें कभी ऐसा महसूस नहीं कराया गया कि हम अलग हैं। हमें पुरुष कैडेट्स जितने ही अवसर मिले। हमारे बीच की एकता और सहारा ही हमारी ताकत बना।”
इशिता मानती हैं कि महिलाओं की यह ऐतिहासिक मौजूदगी आने वाली पीढ़ी की लड़कियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
🏃♀️ 14 किलोमीटर दौड़ने वाली वो लड़कियाँ जो कभी 2 किलोमीटर भी नहीं दौड़ पाईं
एक अन्य कैडेट रितुल ने ट्रेनिंग के अनुभव साझा करते हुए बताया,
“पहले 2 किलोमीटर दौड़ना भी मुश्किल था। अब हम लगातार 14 किलोमीटर दौड़ लेते हैं। यह सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक मजबूती का भी सफर रहा है।”
एनडीए की कठोर ट्रेनिंग ने इन कैडेट्स को मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर निखार दिया है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने खोला था रास्ता
अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए UPSC को महिलाओं को भी NDA परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का आदेश दिया था। यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया था, जिसमें महिलाओं के लिए समान अवसर की मांग की गई थी। तभी से भारतीय सशस्त्र बलों में यह बड़ा बदलाव शुरू हुआ।
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