रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर उग्र होता दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में, यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले क्रीमिया प्रायद्वीप पर ड्रोन हमला किया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई जबकि 15 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इस हमले की जानकारी रूसी रक्षा मंत्रालय ने रविवार को सार्वजनिक की।
हालांकि यूक्रेनी सेना की ओर से इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन रूसी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला रविवार तड़के हुआ और इसमें आगजनी और विस्फोट की भी घटनाएं सामने आईं। रूस का दावा है कि यह हमला नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय युद्ध संधियों का उल्लंघन है।
ड्रोन अटैक के पीछे कौन?
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेनी सेना ने कई ड्रोन लॉन्च किए, जिनमें से अधिकांश को रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया। हालांकि कुछ ड्रोन क्रीमिया के भीतर अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे, जिससे स्थानीय स्तर पर जानमाल की हानि हुई।
मंत्रालय ने कहा, “यूक्रेन की ओर से किया गया यह हमला पूरी तरह से उकसावे की कार्रवाई है। इसमें नागरिकों की जान गई है, जो एक गंभीर युद्ध अपराध है।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला सेवस्तोपोल और आस-पास के क्षेत्रों को निशाना बनाकर किया गया था। धमाके इतने तेज़ थे कि आसपास की इमारतों की खिड़कियां तक चकनाचूर हो गईं।
घायलों का इलाज जारी
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, घायलों में कुछ की हालत गंभीर है। उन्हें सेवस्तोपोल मिलिट्री अस्पताल और अन्य नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जिससे हमले की भयावहता और अधिक चिंताजनक हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अब तक किसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन या देश की ओर से इस हमले पर औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रूस-यूक्रेन संघर्ष को और अधिक जटिल बना सकता है। पश्चिमी देश जहां यूक्रेन को सैन्य मदद मुहैया करा रहे हैं, वहीं रूस इसे सीधे तौर पर नाटो देशों की साजिश करार देता रहा है।
युद्ध की दिशा बदलता क्रीमिया?
गौरतलब है कि क्रीमिया 2014 से रूस के कब्जे में है, लेकिन यूक्रेन इसे अब भी अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। बीते एक वर्ष में यूक्रेन ने कई बार क्रीमिया पर हमले किए हैं, जिनमें विशेष रूप से ड्रोन और मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला क्रीमिया के भीतर रूस की सैन्य पकड़ को कमजोर करने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
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