मध्यप्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व पर्यटन मंत्री सुरेंद्र पटवा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इंदौर कोर्ट ने एक पुराने चेक बाउंस केस में अदालत में बार-बार अनुपस्थित रहने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
यह मामला वर्ष 2019 का है, जिसमें पटवा पर लगभग 43 लाख रुपये के चेक बाउंस का आरोप है। कोर्ट की ओर से कई बार समन भेजे जाने के बावजूद वे पेश नहीं हुए, जिसके बाद यह सख्त कार्रवाई की गई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा ने एक व्यावसायिक लेन-देन के तहत शिकायतकर्ता को 43 लाख रुपये का चेक जारी किया था, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गया। इस पर शिकायतकर्ता ने धारा 138 (NI Act) के तहत केस दर्ज कराया।
मामले की सुनवाई इंदौर की एक विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में चल रही है। पटवा को पूर्व में कई बार नोटिस और समन जारी किए गए थे, लेकिन वे कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हाजिर नहीं हुए।
अदालत की सख्ती
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपी के बार-बार अनुपस्थित रहने से न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो रही है। इसके मद्देनज़र गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है, ताकि अगली सुनवाई में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला आपराधिक प्रकृति का है और इसमें आरोपी की अनुपस्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
सुरेंद्र पटवा की प्रतिक्रिया
अब तक सुरेंद्र पटवा या भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह एक व्यक्तिगत वित्तीय मामला है और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
पटवा मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की बुढ़नी सीट से विधायक हैं और पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे हैं। वे शिवराज सरकार में पर्यटन और संस्कृति मंत्री रह चुके हैं।
क्या कहते हैं जानकार?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, धारा 138 के तहत जारी गिरफ्तारी वारंट एक गंभीर प्रकिया है, और इसमें अदालत की अवमानना की स्थिति भी बन सकती है। यदि विधायक अगली सुनवाई में पेश नहीं होते हैं, तो गिरफ्तारी की कार्रवाई संभव है।
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