क्या टोनी ब्लेयर बने गाज़ा के ‘राजा’? अमेरिका ने तैयार किया विवादित प्रस्ताव

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और ग़ाज़ा की तबाही के बीच एक नया विवादास्पद प्रस्ताव सामने आया है जिसमें शामिल है कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को गाज़ा की अस्थायी अंतर्राष्ट्रीय शासन समिति (Transitional Authority) में अहम भूमिका दी जाए। इस प्रस्ताव के अनुसार, युद्ध समाप्ति के बाद गाज़ा को एक तकनीकी, गैर-पक्षपाती समिति द्वारा संचालित किया जाएगा, और इस समिति की निगरानी एक “Board of Peace” द्वारा की जाएगी, जिसमें ब्लेयर समेत प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय हस्तियाँ शामिल होंगी।

प्रस्ताव की संरचना क्या है?

प्रस्ताव में कहा गया है कि गाज़ा का संचालन एक Gaza International Transitional Authority (GITA) नामक संस्था करेगी, जो पांच वर्ष तक गाज़ा की सर्वोच्च राजनीतिक-न्यायिक सत्ता होगी। शुरुआत में यह संस्था मिस्र के इल-आरिश शहर से कार्य करेगी और फिर स्थितियाँ अनुकूल होने पर गाज़ा में प्रवेश करेगी।

टोनी ब्लेयर को इस बोर्ड का अध्यक्ष बनाने की संभावना है, जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प भी सदस्य होंगे, और अन्य अंतर्राष्ट्रीय नेता भी शामिल किए जाएंगे। यह “Board of Peace” गाज़ा के रोजमर्रा प्रशासन पर निगरानी रखेगा, जबकि स्थानीय कार्यकारी समिति स्वास्थ्य, बिजली, पानी, शिक्षा जैसे सार्वजनिक कार्यों को संचालित करेगी।

प्रस्ताव स्पष्ट करता है कि हमास को इस शासन में भूमिका नहीं दी जाएगी, और गाज़ा की पुनर्रचना की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय समर्थित संघटक मंडल के हाथ में होगी।

विरोध और आलोचनाएँ

हालांकि प्रस्ताव को समर्थन भी मिल रहा है, लेकिन कई आलोचनाएँ भी जोर पकड़ रही हैं। सबसे पहला प्रतिरोध यह है कि इस व्यवस्था में स्थानीय नेतृत्व को किनारा करना है — जिससे यह रवैया “विदेशी हस्तक्षेप” जैसा प्रतीत होगा।

ब्लेयर स्वयं और उनके समर्थक इस भूमिका को एक “साहसिक और बुद्धिमान कदम” कहते हैं, लेकिन कई लोगों ने उनका नाम संकटग्रस्त बताया है — विशेष रूप से उनकी इराक युद्ध में भूमिका के कारण उन्हें विवादों से जोड़कर देखा जाता है।

कुछ आलोचक इसे गाज़ा को विभाजन की ओर ले जाने वाला कदम मानते हैं और कहते हैं कि यह मॉडल एकता को कमजोर कर सकता है।

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