भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को ‘वोट चोरी की साजिश’ करार देते हुए दिसंबर के पहले हफ्ते में दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान पर विशाल रैली आयोजित करने का ऐलान किया है। यह फैसला पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में हुई महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में लिया गया, जहां 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारियों, प्रदेश इकाई प्रमुखों, विधायक दल नेताओं और सचिवों ने हिस्सा लिया। बैठक में न सिर्फ SIR पर कड़ा रुख अपनाया गया, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर जवाबदेही तय करने जैसे अन्य फैसलों ने पार्टी को नई ऊर्जा दी है। कांग्रेस का दावा है कि यह रैली लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनआंदोलन का रूप लेगी।
बैठक, जो ढाई घंटे चली, हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद बुलाई गई थी। कांग्रेस ने हार का ठीकरा SIR प्रक्रिया पर फोड़ा, जिसे वे ‘लोकतंत्र के गला घोंटने’ की कोशिश बता रहे हैं। खरगे ने बैठक में स्पष्ट कहा, “चुनाव आयोग को साबित करना होगा कि वह भाजपा की छाया में काम नहीं कर रहा। SIR के नाम पर असली मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जो विपक्षी दलों को कमजोर करने की साजिश है।” राहुल गांधी ने इसे ‘संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग’ बताते हुए कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर विरोध की अपील की। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, “यह प्रक्रिया लोकतंत्र को खत्म करने वाली है। हम दिसंबर की रैली से देशभर के 5 करोड़ फॉर्म इकट्ठा कर आयोग को चुनौती देंगे।”
SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की जांच होगी। कांग्रेस का आरोप है कि इस कवायद में भाजपा समर्थित नाम जोड़े जा रहे हैं, जबकि गरीब, अल्पसंख्यक और विपक्षी समर्थकों के नाम हटाए जा रहे। पार्टी ने तमिलनाडु में वोटर लिस्ट बायकॉट का फैसला लिया है, जबकि अन्य राज्यों में स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज होंगे। वेणुगोपाल ने कहा, “रैली में लाखों कार्यकर्ता जुटेंगे, और हम विपक्षी दलों को भी जोड़ेंगे। यह सिर्फ कांग्रेस का नहीं, पूरे लोकतंत्र का मुद्दा है।”
बैठक में अन्य महत्वपूर्ण फैसलों ने संगठन को मजबूत करने पर फोकस किया। पहला, जमीनी स्तर के नेताओं की जवाबदेही तय की गई – हर प्रदेश इकाई को SIR विरोध के लिए मासिक रिपोर्ट देनी होगी, और कमजोर प्रदर्शन पर कार्रवाई होगी। दूसरा, बिहार हार की समीक्षा में पाया गया कि स्थानीय नेतृत्व की निष्क्रियता जिम्मेदार थी, इसलिए सभी राज्यों में ‘एक्टिव मेंटरिंग सिस्टम’ लागू किया जाएगा, जहां वरिष्ठ नेता नियमित दौरा करेंगे। तीसरा, पार्टी ने संसद के शीतकालीन सत्र (1 से 19 दिसंबर) में SIR पर हंगामा तेज करने का प्लान बनाया, जहां इंडिया ब्लॉक के साथ मिलकर महाभियोग जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। खरगे ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, “भाजपा SIR को वोट चोरी का हथियार बना रही है। अगर आयोग नहीं सुनेगा, तो जनता सड़क पर उतरेगी।”
कांग्रेस के इस ऐलान ने भाजपा को उकसा दिया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “कांग्रेस हार को छिपाने के लिए SIR का रोना रो रही है। आयोग स्वतंत्र है, और यह प्रक्रिया पारदर्शी है।” लेकिन विपक्षी खेमे में उत्साह है। आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने रैली में शामिल होने का संकेत दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा 2025 के कई विधानसभा चुनावों में असर डालेगा, खासकर जहां SIR लागू हो रहा है।
शशि थरूर जैसे वरिष्ठ नेता बैठक से नदारद रहे, जिसका कारण उनका कार्यालय स्वास्थ्य समस्या बता रहा है। लेकिन पार्टी आशावादी है। क्या दिसंबर की रैली चुनाव आयोग को बैकफुट पर लाएगी? या यह कांग्रेस की हार को भुलाने का हथकंडा साबित होगा? आने वाले हफ्तों में साफ होगा। फिलहाल, SIR विवाद ने राजनीतिक तापमान को चढ़ा दिया है, और रामलीला मैदान एक बार फिर विपक्ष का गढ़ बनेगा।
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