दिल्ली चुनाव में मजबूती से मैदान में उतरने का दावा करने वाली कांग्रेस अब बैकफुट पर नजर आ रही है। राहुल गांधी की 3 प्रस्तावित रैलियां रद्द होने के बाद पार्टी की रणनीति और प्रचार अभियान पर सवाल उठने लगे हैं।
राहुल गांधी की रैलियां रद्द: कांग्रेस की दलील
राहुल गांधी ने अब तक दिल्ली में केवल एक रैली की है, जो सीलमपुर में हुई थी। इसमें उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा था। इसके बाद उनकी नई दिल्ली, सदर बाजार और मुस्तफाबाद में रैलियां तय थीं, लेकिन तीनों रैलियां रद्द कर दी गईं।
कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी स्वास्थ्य कारणों से रैली नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के इस तर्क पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है और कांग्रेस के बड़े नेता—सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे—सभी दिल्ली में मौजूद हैं। बावजूद इसके, राहुल की जगह किसी अन्य नेता को प्रचार के लिए नहीं भेजा गया।
बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल
राहुल गांधी की रैली जहां रद्द हो रही है, वहीं कांग्रेस का कोई बड़ा नेता अब तक प्रचार के लिए मैदान में नहीं उतरा है। हाईकमान की यह निष्क्रियता पार्टी के चुनावी अभियान को कमजोर कर रही है।
2021 में भी ऐसा ही बंगाल चुनाव में हुआ था, जब राहुल गांधी ने अपनी सभी रैलियां रद्द कर दी थीं। उस समय यह माना गया कि राहुल ने पर्दे के पीछे से ममता बनर्जी को समर्थन देने के लिए रैलियां रद्द की थीं।
बीजेपी का निशाना: “कौन सी खिचड़ी पक रही है?”
राहुल गांधी की रैलियों के रद्द होने पर बीजेपी ने कांग्रेस पर तंज कसा है। बीजेपी सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा, “राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल के बीच नए गठजोड़ की कवायद हो रही है। यही वजह है कि कांग्रेस निष्क्रिय हो गई है।”
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के अधिकांश नेता चुनाव प्रचार से दूर हैं और सिर्फ संदीप दीक्षित अकेले आम आदमी पार्टी से लड़ रहे हैं।
चुनावी समय सीमित, 3 फरवरी तक प्रचार का मौका
दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर 5 फरवरी को मतदान होना है। 3 फरवरी तक उम्मीदवारों के पक्ष में रैली करने का समय है। ऐसे में कांग्रेस के पास बहुत कम समय बचा है।
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