गूगल को टक्कर देने आया ‘कॉमेट’, अब हर किसी के लिए मुफ्त

टेक्नॉलॉजी की दुनिया में चुपचाप उभरने वाली एक नई चुनौती गूगल की हाई-हेड टेक्नोलॉजी पर दस्तक दे रही है। Perplexity ने अपने AI-सक्षम ब्राउज़र “कॉमेट (Comet)” को अब सभी उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त कर दिया है। यह कदम ब्राउज़र बाज़ार में एक खासी हलचल मचा सकता है।

कॉमेट के मुफ्त में उपलब्ध होने की घोषणा कंपनी के CEO अरविंद श्रीनिवास ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X (पूर्व ट्विटर) पर की। उन्होंने बताया कि अब Free, Pro और Max — तीनों योजनाओं के उपयोगकर्ता इसे डाउनलोड और प्रयोग कर सकते हैं।इससे पहले यह ब्राउज़र केवल प्रीमियम योजनाओं तक ही सीमित था।

कॉमेट का ढांचा क्रोमियम (Chromium) पर तैयार है, जिससे यह Google Chrome के एक्सटेंशन्स और बुकमार्क सपोर्ट करता है।लेकिन इसकी असली खासियत इसके AI‑सक्षम उपयोगी फीचर्स हैं — जैसे वेबपेज संक्षेपण (summarization), टैब और वर्कफ़्लो प्रबंधन, व्यक्तिगत सुझाव, और पूरे कामों को ऑटोमेशन की तरह पूरा करना।

कॉमेट ब्राउज़र में एक AI साइडबार होता है, जहाँ उपयोगकर्ता अपनी आवश्यताओं के अनुसार निर्देश दे सकते हैं — जैसे ईमेल लिखना, मीटिंग शेड्यूल करना, वेबपेज को ईमेल में बदलना आदि कार्य।इसके अलावा, यह उपयोगकर्ता के पढ़े हुए, वर्तमान काम और खोजों की जानकारी का उपयोग कर प्रासंगिक सुझाव प्रदान करता है।

कॉमेट की एक अन्य विशेषता है “वर्कस्पेस” — यह पारंपरिक टैब व्यवस्था से अलग, एक परिप्रेक्ष्य आधारित संरचना देता है, जिसमें समान विषय या काम संगठित रहते हैं।साथ ही कंपनी ने “Comet Plus” नामक एक सब्सक्रिप्शन मॉडल भी पेश किया है, जो विशेष न्यूज़ कंटेंट तक पहुँच देता है।

भारत में भी इसे उत्साह के साथ स्वीकार किया गया है। कॉमेट पहले Pro उपयोगकर्ताओं के लिए जारी किया गया था, और अब यह सभी के लिए खुला कर दिया गया है।ऐप के रूप में Android वर्जन के लिए प्री-रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है।

हालाँकि, यह सभी सकारात्मक पक्ष नहीं हैं। कुछ सुरक्षा निगरानी समूहों ने कॉमेट में गंभीर कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाया है। उदाहरण स्वरूप, Brave और Guardio ने आरोप लगाया है कि कॉमेट AI सुरक्षा नीतियों का उल्लंघन कर सकती है — मालिशस कमांड निष्पादन की क्षमता या फिशिंग हमले की जोखिमों को खामियों के रूप में उजागर किया गया है। इन रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि AI‑संबंधित कार्यों में उपयोगकर्ता इनपुट के साथ अनचाहे कोड निष्पादित हो सकते हैं।

तकनीक के जानकार यह मानते हैं कि कॉमेट जैसा AI-एक्सटेंशन ब्राउज़िंग को “सक्षम” बना सकता है, लेकिन उपयोगकर्ता को चौकन्ना रहना होगा। AI द्वारा दिए गए सुझावों को मानव समीक्षा की आवश्यकता होगी, खासकर संवेदनशील कार्यों में।

यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि कॉमेट अब सिर्फ एक ब्राउज़र नहीं, बल्कि एक “सहायक एजेंट” की तरह काम करने का प्रयास करता है — इंटरनेट को पारंपरिक तरीके से उपभोग करने के बजाय, यह उपयोगकर्ता की ओर से सोचने और काम करने का प्रयास करता है।इस बदलाव से ब्राउज़र इकाई का स्वरूप ही बदल सकता है।

अब सवाल उठता है कि क्या कॉमेट गूगल क्रोम की हीरोइनशिप को चुनौती दे पाएगा? फिलहाल यह एक साहसी शुरुआत है — जो आगे के अपडेट, सुरक्षा सुधार और उपयोगकर्ता स्वीकार्यता पर निर्भर करेगी।

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