क्लाउडफ्लेयर का ब्लैकआउट: X से चैटजीपीटी तक साइट्स डाउन, इंटरनेट की दुनिया ठप

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट लोड न होने से लेकर ओपनएआई का चैटजीपीटी चैटबॉट ठप होने तक – वैश्विक इंटरनेट आज एक घंटे से ज्यादा समय के लिए हिचकिचाया। वजह? अमेरिकी कंपनी क्लाउडफ्लेयर का गंभीर आउटेज, जिसने लाखों वेबसाइट्स और ऐप्स को प्रभावित किया। सुबह 9 बजे ईएसटी (भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे) शुरू हुई यह खराबी दोपहर तक लगभग ठीक हो गई, लेकिन इसने डिजिटल दुनिया की नाजुकता को एक बार फिर बेनकाब कर दिया। क्लाउडफ्लेयर ने अपने स्टेटस पेज पर पुष्टि की कि ग्लोबल नेटवर्क में समस्या थी, जिसका असर एप्लिकेशन सर्विसेज पर पड़ा। कंपनी के शेयर 3% से ज्यादा लुढ़क गए, जबकि डाउनडिटेक्टर जैसी ट्रैकिंग साइट्स खुद प्रभावित हो गईं।

क्लाउडफ्लेयर क्या है? 2009 में स्थापित यह सैन फ्रांसिस्को आधारित कंपनी इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का ‘सुरक्षा कवच’ है। सरल शब्दों में, यह वेबसाइट्स को साइबर हमलों से बचाती है, कंटेंट को तेजी से लोड करती है और ट्रैफिक मैनेजमेंट करती है। लाखों वेबसाइट्स – छोटी ब्लॉग्स से लेकर गूगल, अमेजन जैसी दिग्गजों तक – क्लाउडफ्लेयर की सर्विसेज पर निर्भर हैं। कंपनी का कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN) दुनिया भर के 300 से ज्यादा डेटा सेंटर्स से काम करता है, जो यूजर्स को नजदीकी सर्वर से कंटेंट पहुंचाता है। इसके अलावा, DDoS अटैक प्रोटेक्शन, SSL सर्टिफिकेट्स और बॉट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं इसे ‘इंटरनेट का गार्डियन’ बनाती हैं। 2024 में क्लाउडफ्लेयर की वैल्यूएशन 30 बिलियन डॉलर से ऊपर पहुंची, लेकिन आज का आउटेज ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।
आउटेज की शुरुआत अमेरिकी पूर्वी समयानुसार सुबह 7 बजे हुई, जब यूजर्स को “क्लाउडफ्लेयर नेटवर्क पर इंटरनल सर्वर एरर” का मैसेज मिलने लगा।

डाउनडिटेक्टर पर 11,000 से ज्यादा कंप्लेंट्स दर्ज हुईं। प्रभावित साइट्स में X के अलावा स्पॉटिफाई, अमेजन, शॉपीफाई, इंडीड, ट्रुथ सोशल, ग्रिंडर, विंटेड और बेट365 शामिल रहीं। ओपनएआई का चैटजीपीटी और एंथ्रोपिक का क्लाउड चैटबॉट भी ठप हो गए। गेमिंग में लीग ऑफ लीजेंड्स प्रभावित हुआ, जबकि NJ ट्रांजिट की डिजिटल सर्विसेज भी रुक गईं। भारत में X और चैटजीपीटी यूजर्स ने भारी शिकायतें कीं, जहां शाम के समय सोशल मीडिया एक्टिविटी चरम पर होती है। कंपनी ने स्टेटस पेज पर अपडेट दिए – पहले WARP और एक्सेस सर्विसेज रिस्टोर कीं, फिर डैशबोर्ड ठीक किया। दोपहर 2:42 बजे ईएसटी तक ज्यादातर सर्विसेज नॉर्मल हो गईं, लेकिन कुछ यूजर्स को लंदन में WARP एक्सेस की समस्या बनी रही।

क्लाउडफ्लेयर के सीईओ मैथ्यू प्रिंस ने कहा, “हम समस्या की जांच कर रहे हैं और फिक्स लागू कर चुके हैं। मॉनिटरिंग जारी है।” लेकिन वजह स्पष्ट नहीं हुई – क्या यह ट्रैफिक स्पाइक था या सॉफ्टवेयर गड़बड़ी? विशेषज्ञों का मानना है कि क्लाउडफ्लेयर जैसे सेंट्रलाइज्ड प्रोवाइडर्स पर निर्भरता ‘सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर’ पैदा करती है। हाल ही में अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) का 24 घंटे का आउटेज और माइक्रोसॉफ्ट एज्योर का ग्लोबल ब्रेकडाउन इसी चेन का हिस्सा हैं। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट ब्रूस श्नायर ने कहा, “इंटरनेट की फ्रैजिलिटी बढ़ रही है। एक कंपनी की खराबी पूरी अर्थव्यवस्था को हिला सकती है।” आउटेज से ई-कॉमर्स और फाइनेंशियल सर्विसेज को करोड़ों का नुकसान हुआ, जबकि यूजर्स का भरोसा डगमगाया।

यह घटना डिजिटल इकोसिस्टम की कमजोरियों को उजागर करती है। क्लाउडफ्लेयर जैसी कंपनियां जरूरी हैं, लेकिन बैकअप सिस्टम्स और रेडंडेंसी की कमी घातक साबित हो रही है। क्या सरकारें और टेक जायंट्स अब डिस्ट्रिब्यूटेड इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करेंगी? फिलहाल, यूजर्स को राहत मिली है, लेकिन अगला ‘ब्लैकआउट’ कब आएगा – यह सवाल अनुत्तरित है।

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