लद्दाख के पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) झील के नज़दीक चीन की सैन्य गतिविधियाँ फिर एक बार चर्चा में हैं, क्योंकि ताजा सैटेलाइट तस्वीरें यह दर्शाती हैं कि बफर जोन के पास चीनी सेना ने सर्विलांस टावर, सड़कों और अन्य ढांचों का निर्माण तेज़ कर दिया है। यह कदम भारत‑चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के समीप स्थित संवेदनशील इलाके में तनाव की वजह बन सकता है, जहाँ कई सालों से दोनों देशों की सेनाओं के बीच विवाद और गतिरोध चला आ रहा है।
पैंगोंग झील का उत्तरी किनारा और आसपास का पर्वतीय इलाका उस हिस्से का हिस्सा है, जिसे भारत और चीन ‘फिंगर्स एरिया’ (Finger Area) के नाम से जानते हैं। यहाँ पर पहाड़ों की चोटी उंगलियों की तरह दिखती हैं, जिन्हें फिंगर‑1 से लेकर फिंगर‑8 तक सीमांकित किया जाता है। भारत का दावा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा फिंगर‑8 तक है, लेकिन चीन इसके विपरीत फिंगर‑2 तक LAC मानता है, जिससे दो देशों के बीच यह विवाद जटिल बना हुआ है।
नई तस्वीरों में स्पष्ट है कि चीन ने बफर जोन के बेहद करीब एक सर्विलांस टावर और अन्य संरचनाएँ स्थापित कर दी हैं, जिससे क्षेत्र में उसकी नजर रखने की क्षमता और मजबूत हुई है। ये बुनियादी ढांचे सैनिकियों के सड़क मार्ग, निगरानी उपकरण और उच्च‑तकनीक वाली पोस्ट शामिल हैं, जो इलाके पर नियंत्रण और नजर बनाए रखने में मदद करते हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि चीन अपनी भौतिक मौजूदगी को और पुख्ता करना चाहता है, खासकर 2020 के बाद से जारी सीमा गतिरोध के बीच।
भारत ने लंबे समय से फिंगर‑5 से फिंगर‑8 के बीच के इलाके में नियमित पेट्रोलिंग की है और इस बफर क्षेत्र पर भी कड़ी निगरानी रखी हुई है। भारतीय सेना फिंगर‑1 से फिंगर‑4 तक नियमित तौर पर गश्त करती है, जबकि फिंगर‑5 से आगे का इलाका अभी तक दोनों पक्षों के लिये पारंपरिक रूप से पेट्रोलिंग के लिये खुला माना जाता रहा है।
चीन ने पहले भी इस इलाके पर संरचनाएँ और सड़कें बनाने की कोशिश की थी, पर भारत के सख्त विरोध के कारण उसे कुछ कदम पीछे हटना पड़ा था। फिर भी पिछले कुछ वर्षों से चीन लगातार LAC के पास अपने मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है, जैसे बंकर, सर्विलांस पोस्ट और सर्वेक्षण‑योग्य प्लेटफॉर्म। इससे भारत‑चीन सीमा पर बने स्थायी गतिरोध की स्थिति और जटिल होती जा रही है।
फिंगर विवाद की जड़ 1962 के बाद से चली आ रही दोनों पक्षों में सीमा पहचान के भिन्न मत से जुड़ी है। भारत मानता है कि उसकी पेट्रोलिंग सीमा फिंगर‑8 तक है पर चीन उसका विरोध करता हुआ पूर्व की ओर अपने दावे पर कायम रहा है। यही कारण है कि 2020 के बाद से कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत के बावजूद इस इलाके में अस्थिरता बनी हुई है।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्विलांस टावर और अन्य निर्माण से चीन को इलाके पर नजर रखने, सीमा‑पार गतिविधियों का रियल‑टाइम अवलोकन करने तथा रणनीतिक जानकारी इकट्ठा करने की सुविधा मिलती है। ऐसे निगरानी उपकरणों के स्थापत्य से स्थानीय शांति और विश्वास‑निर्माण उपायों पर असर पड़ सकता है और यह बातचीत की प्रक्रिया को भी जटिल बना सकता है।
भारत‑चीन सीमा विवाद के संदर्भ में पैंगोंग झील और फिंगर क्षेत्र पहले भी संघर्ष का केंद्र रहे हैं। 2020 में यहाँ गतिरोध और आमने‑सामने की स्थिति देखने को मिली थी, जिससे दोनों देशों ने सैन्य बातचीत शुरू की थी और कुछ क्षेत्रों में असंतुलन को कम करने का प्रयास किया गया था।
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