एक समय था जब बच्चे सुबह उठते ही खेलने के लिए निकल पड़ते थे। आज, बदलती जीवनशैली और तकनीकी निर्भरता ने बच्चों की शारीरिक सक्रियता पर असर डाला है। इसका सीधा प्रभाव उनकी हड्डियों की सेहत पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो आजकल कम उम्र में ही बच्चों में हड्डियों की कमजोरी, दर्द, विटामिन की कमी और मोटापा जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं — जो पहले अधेड़ उम्र में देखने को मिलते थे।
आइए जानें, किन कारणों से बच्चों की हड्डियाँ कमजोर हो रही हैं और माता-पिता को किन बातों पर सतर्क रहने की जरूरत है।
1. विटामिन D और कैल्शियम की कमी
हड्डियों की मजबूती के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व हैं — कैल्शियम और विटामिन D। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर शहरी बच्चे अब पर्याप्त धूप में समय नहीं बिताते, जिससे शरीर में विटामिन D का स्तर घट जाता है। इसी के चलते कैल्शियम का अवशोषण नहीं हो पाता, और हड्डियाँ कमजोर होने लगती हैं।
डॉ. कहती हैं, “बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 15–20 मिनट सूरज की रोशनी मिलनी चाहिए, खासकर सुबह की।”
2. शारीरिक गतिविधियों की कमी
डिजिटल युग में मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं। घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठना, बाहर खेलने की आदत को खत्म कर रहा है। हड्डियों को मजबूत बनने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि आवश्यक है।
खेलना, दौड़ना, साइकल चलाना जैसी गतिविधियाँ हड्डियों पर प्राकृतिक दबाव डालती हैं, जिससे वे मजबूत बनती हैं। जब ये गतिविधियाँ नहीं होतीं, तो हड्डियाँ नाजुक रह जाती हैं।
3. जंक फूड की बढ़ती लत
बाजार में मिलने वाले फास्ट फूड और जंक फूड — जैसे कि पिज्ज़ा, बर्गर, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक — बच्चों के खानपान का हिस्सा बनते जा रहे हैं। ये खाद्य पदार्थ कैल्शियम और प्रोटीन से रहित होते हैं, और इनमें मौजूद फॉस्फेट, शरीर से कैल्शियम को बाहर निकालने में मदद करता है।
इसका नतीजा यह होता है कि हड्डियों की घनता (Bone Density) कम होती जाती है, और वे आसानी से टूटने या मुड़ने लगती हैं।
4. जन्म से जुड़ी या आनुवंशिक समस्याएं
कुछ बच्चों में हड्डियों की कमजोरी का कारण जन्मजात होता है। जैसे कि ऑस्टियोगेनेसिस इम्परफेक्टा (एक दुर्लभ आनुवंशिक रोग), जिससे हड्डियाँ सामान्य से पतली और नाजुक होती हैं। ऐसे मामलों में नियमित चिकित्सा परामर्श और उपचार आवश्यक होता है।
5. गलत पोषण और अनियमित दिनचर्या
बच्चों का खानपान अक्सर असंतुलित होता है — या तो बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट्स, या प्रोटीन की कमी। इसके अलावा देर से सोना, पर्याप्त नींद न लेना और अनुशासनहीन दिनचर्या भी बच्चों की ग्रोथ और हड्डियों की मजबूती पर नकारात्मक असर डालती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
“बच्चों की हड्डियाँ तेज़ी से बढ़ती हैं। अगर इसी उम्र में उन्हें पर्याप्त पोषण, व्यायाम और धूप न मिले, तो आगे चलकर समस्याएं स्थायी हो सकती हैं।
क्या करें माता-पिता?
बच्चों को रोज़ धूप में खेलने के लिए प्रोत्साहित करें
घर के भोजन में दूध, दही, पनीर, हरी सब्ज़ियाँ और दालें शामिल करें
बच्चों को कम से कम एक घंटा एक्टिव टाइम दें — खेल, दौड़ या योग
कैल्शियम और विटामिन D की नियमित जांच कराएं
स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें
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