भारत में ChatGPT की बढ़ती लोकप्रियता: कौन करता है रोज़ाना इस्तेमाल और क्यों

आज की डिजिटल दुनिया में ChatGPT सिर्फ एक तकनीकी नवाचार नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा साथी बन गया है जो लोगों की दैनिक ज़रूरतों, सोच‑समझ और सर्जनात्मकता से जूड़ी हर तरह की ख्वाहिशों का जवाब देने का वादा करता है। हाल की OpenAI स्टडीज़ और सर्वेक्षणों से अब यह स्पष्ट हो गया है कि कौन‑से वर्ग ChatGPT का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं — और लोग सबसे अधिक किस तरह की जानकारी चाहते हैं।

इस्तेमाल करने वालों की तस्वीर

सबसे पहले, युवा पीढ़ी — ख़ासकर 18‑25 साल के लोग — ChatGPT के सबसे बड़े उपयोगकर्ता समूह हैं।वे छात्र हों, शुरुआती करियर में हों, या ज्ञान‑कार्य (knowledge work) से जुड़े हुए — ये लोग ChatGPT को टास्क पूरा करने, लिखावट सुधारने, जानकारी खोजने और रचनात्मक प्रयासों में साथी के रूप में देखते हैं।महिलाओं का अनुपात भी बढ़ रहा है, जिससे यह साफ़ संकेत मिलता है कि यह तकनीक केवल तकनीकी पेशेवरों या पुरुषों तक सीमित नहीं रही।

भारत में ChatGPT का इस्तेमाल बहुत व्यापक है। एक सर्वे के अनुसार लगभग 36% भारतीय उपयोगकर्ता हर दिन ChatGPT से बातचीत करते हैं — जो वैश्विक औसत से दोगुना है।इसके अलावा, लगभग 30‑40% लोग ChatGPT का उपयोग सूचना प्राप्त करने के लिए करते हैं — खासकर वे लोग जो गूगल सर्च की जगह अधिक इंटरैक्टिव व व्यापक उत्तर चाहते हैं।

लोग क्या जानना चाहते हैं — चर्चित विषय

सर्वाधिक खोजे जाने वाले विषयों में “जानकारी” की मांग सबसे ऊपर है। अर्थात्, लोग कैसे‑करें (how‑to) गाइड्स, तथ्य‑आधारित उत्तर, शिक्षा‑संबंधी सामग्री, करियर सम्बंधित सलाह और लाइफ‑स्टाइल सुझाव चाहते हैं।इसके अलावा, लेखन‑सुधार (writing assistance), ई‑मेल या डॉक्यूमेंट एडिटिंग, सारांश तैयार करना (summarization), और रचनात्मक लेखन जैसे कविता, कहानी या ब्लॉग पोस्ट भी बहुत लोकप्रिय उपयोग हैं।

“पर्सनल” चैट्स भी बढ़ रही हैं — जैसे रिश्ते‑परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य, दैनिक जीवन के अनुभव आदि। लोग ChatGPT से अपने मन की बातें साझा करना चाहते हैं, या किसी सलाह या प्रेरणा की तलाश में रहते हैं।

चुनौतियाँ एवं सावधानियाँ

हालाँकि, इस बड़े उपयोग के साथ कुछ चिंताएँ भी सामने आई हैं। OpenAI ने स्वयं बताया है कि ChatGPT से मिलने वाली जानकारी को “दूसरी राय” की तरह लेना चाहिए, न कि एकमात्र प्रामाणिक स्रोत की तरह।साथ ही, कुछ रिपोर्टों में संकेत हैं कि अत्यधिक उपयोग से स्मृति, ध्यान और सोचने‑समझने की प्रक्रियाओं पर प्रभाव हो सकता है।

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