आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के चलते अब कई गंभीर बीमारियां युवा आबादी को तेजी से अपनी चपेट में ले रही हैं। इन्हीं में से एक है कोलोरेक्टल कैंसर – एक ऐसा कैंसर जो आंतों (कोलन) और मलाशय (रेक्टम) में विकसित होता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पहले जहां इस बीमारी को वृद्धावस्था से जोड़कर देखा जाता था, वहीं अब 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इसका एक अहम शुरुआती लक्षण ऐसा है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर बैठते हैं — मल त्याग की आदतों में बदलाव, खासकर खून के धब्बे के साथ मल आना।
क्या है कोलोरेक्टल कैंसर और क्यों है यह गंभीर?
कोलोरेक्टल कैंसर को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक वह उन्नत चरण में पहुंच चुकी होती है।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. बताते हैं –
“अब हर साल भारत में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में 15–20% वृद्धि देखी जा रही है, और चिंताजनक बात यह है कि युवा पेशेंट्स में यह बीमारी पहले से अधिक आक्रामक रूप में सामने आ रही है।”
नजरअंदाज न करें ये संकेत:
1. मल में खून आना
यह सबसे सामान्य लेकिन सबसे ज्यादा अनदेखा किया जाने वाला लक्षण है। लोग इसे अक्सर बवासीर समझकर इलाज टाल देते हैं, जबकि यह कोलोरेक्टल कैंसर का प्राथमिक संकेत हो सकता है।
2. बार-बार पेट साफ न होना या दस्त लगना
मल त्याग की आदतों में बदलाव लंबे समय तक बना रहे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।
3. पेट में लगातार दर्द या गैस
बिना किसी स्पष्ट कारण के पेट में बार-बार मरोड़ या भारीपन को न करें नजरअंदाज।
4. वजन का अचानक गिरना
अगर बिना डाइटिंग के वजन कम हो रहा है, तो यह शरीर के भीतर किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
5. थकान और कमजोरी
आंतरिक ब्लीडिंग के चलते शरीर में खून की कमी हो सकती है, जिससे थकावट बनी रहती है।
कम उम्र में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
प्रोसेस्ड और फास्ट फूड की अधिकता
फाइबर की कमी और लाल मांस का अधिक सेवन
सिडेंट्री लाइफस्टाइल और व्यायाम की कमी
धूम्रपान और शराब
जेनेटिक फैक्टर
क्या करें बचाव के लिए?
साल में एक बार कोलनoscopy या स्टूल टेस्ट कराना
फाइबर युक्त आहार लेना
रेड मीट, धूम्रपान और अल्कोहल से दूरी
नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण
किसी भी बदलाव को लेकर तुरंत डॉक्टर से परामर्श
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