सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से रोका जा सकता है — अगर समय पर पहचान और जांच की जाए।
भारत में हर साल लाखों महिलाएँ इस बीमारी से प्रभावित होती हैं, और इसकी सबसे बड़ी वजह है जानकारी की कमी और देर से जांच कराना।
तो आइए समझते हैं — आखिर सर्वाइकल कैंसर होता क्या है, इसके लक्षण क्या हैं, और इससे बचाव कैसे संभव है।
क्या है सर्वाइकल कैंसर?
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय (Uterus) के निचले हिस्से — यानी गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में होने वाला कैंसर है।
यहाँ की कोशिकाएँ (cells) धीरे-धीरे असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और समय के साथ कैंसर में बदल सकती हैं।
मुख्य कारण है ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) नामक संक्रमण, जो एक यौन संपर्क से फैलने वाला वायरस है।
सर्वाइकल कैंसर के मुख्य कारण
- HPV वायरस संक्रमण (Human Papillomavirus)
- कम उम्र में यौन संबंध बनाना
- अधिक यौन साथियों का होना
- धूम्रपान या तंबाकू सेवन
- कमज़ोर इम्यून सिस्टम (जैसे HIV संक्रमण)
- साफ-सफाई की कमी या लंबे समय तक संक्रमण का इलाज न कराना
शुरुआती लक्षण जो नज़रअंदाज़ न करें
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरण में कोई खास दर्द नहीं होता, इसलिए इसे “साइलेंट कैंसर” भी कहा जाता है।
लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए:
- माहवारी के बीच या यौन संबंध के बाद योनि से रक्तस्राव (Bleeding)
- असामान्य या दुर्गंधयुक्त डिस्चार्ज
- कमर या पेल्विक क्षेत्र में दर्द
- वज़न घटना या थकान बढ़ना
- मूत्र त्याग में जलन या दर्द
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
जरूरी जांचें (Screening Tests)
सर्वाइकल कैंसर की जांचें बेहद आसान और सुरक्षित होती हैं। नियमित जांच से इसे शुरुआती अवस्था में पकड़ा जा सकता है।
- पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test):
यह सबसे जरूरी जांच है जिसमें गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं की जांच की जाती है।
🔹 हर 3 साल में एक बार करवाना चाहिए (30 साल की उम्र के बाद)। - HPV DNA टेस्ट:
यह टेस्ट HPV वायरस के संक्रमण का पता लगाता है।
🔹 यह टेस्ट 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सुझाया जाता है। - कोल्पोस्कोपी (Colposcopy):
अगर पैप टेस्ट में कोई असामान्यता मिले तो डॉक्टर यह जांच करते हैं।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे करें?
- HPV वैक्सीन लगवाएँ:
यह टीका 9 से 26 साल की उम्र की लड़कियों के लिए सबसे प्रभावी है, लेकिन वयस्क महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है।
यह वैक्सीन कैंसर पैदा करने वाले HPV वायरस से सुरक्षा देता है। - सुरक्षित यौन संबंध बनाएँ:
यौन संबंधों के दौरान सुरक्षा का उपयोग करें ताकि संक्रमण का खतरा घटे। - धूम्रपान से दूर रहें:
यह इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है और कैंसर का खतरा बढ़ाता है। - स्वच्छता और व्यक्तिगत देखभाल का ध्यान रखें।
- नियमित जांच करवाएँ:
हर 3 साल में एक बार पैप स्मीयर टेस्ट जरूर कराएँ, भले ही कोई लक्षण न हों।
सर्वाइकल कैंसर कोई डरावनी बीमारी नहीं है — यह समय रहते पकड़ा जाए तो 100% ठीक हो सकता है।
जरूरी है कि महिलाएँ अपने शरीर के संकेतों को समझें, खुलकर डॉक्टर से बात करें, और नियमित जांच करवाएँ।
थोड़ी सी जागरूकता और समय पर कदम उठाने से न सिर्फ आपकी बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सेहत भी सुरक्षित रह सकती है।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check