डायबिटीज रोगियों के लिए आहार हमेशा एक संवेदनशील विषय रहा है। कई लोग चावल से दूरी बनाए रखने की सलाह देते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि संतुलित मात्रा में इसका सेवन संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज में चावल पूरी तरह से निषिद्ध नहीं है, लेकिन इसके सेवन में सतर्कता और समझदारी जरूरी है।
क्यों बढ़ सकती है शुगर?
सफेद चावल (पॉलीश्ड राइस) का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) उच्च होता है, जिसका मतलब है कि इसे खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। डायबिटीज मरीजों में यह अचानक शुगर स्पाइक्स का कारण बन सकता है। लगातार उच्च शुगर स्तर हृदय रोग, किडनी समस्या और आंखों की बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है।
डायबिटीज रोगी चावल कैसे खा सकते हैं?
मात्रा का ध्यान रखें
प्लेट में चावल की मात्रा को सीमित रखें।
सामान्यत: आधा प्लेट सब्जियों, एक-चौथाई प्लेट चावल और एक-चौथाई प्लेट प्रोटीन हो।
ब्राउन राइस या मल्टीग्रेन चावल चुनें
ब्राउन राइस में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो शुगर के स्तर को धीरे-धीरे बढ़ाता है।
मल्टीग्रेन चावल में प्रोटीन और विटामिन भी अधिक होते हैं।
खाली पेट न खाएं
चावल का सेवन कभी खाली पेट न करें।
सब्जियों और प्रोटीन के साथ खाने से शुगर स्तर पर नियंत्रण रहता है।
भोजन के साथ व्यायाम
चावल खाने के बाद हल्की वॉक या फिजिकल एक्टिविटी शुगर कंट्रोल में मदद करती है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स की जानकारी रखें
कम GI वाले चावल का चयन करें।
उदाहरण के लिए, साबुत अनाज वाला बासमती या इन्डिका राइस डायबिटीज रोगियों के लिए बेहतर विकल्प है।
विशेषज्ञों की राय
एनडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटीज विशेषज्ञ कहते हैं कि संतुलित आहार और नियमित शुगर मॉनिटरिंग ही सबसे प्रभावी उपाय हैं। चावल पूरी तरह से त्यागने के बजाय, सही प्रकार और मात्रा में सेवन बेहतर है।
डायबिटीज में केवल चावल ही नहीं, बल्कि सभी कार्बोहाइड्रेट स्रोतों पर ध्यान देना जरूरी है। ब्रेड, मैगी, पास्ता और आलू जैसी चीजें भी शुगर लेवल बढ़ा सकती हैं।
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