महिलाओं के बीच एक पुराना मिथक बहुत फैल चुका है कि ब्रा की टाइटनेस या रंग स्तन कैंसर का कारण बन सकता है। सोशल मीडिया और अनगिनत चर्चा में यह धारणा इतनी लोकप्रिय हो गई है कि कई महिलाएं ब्रा पहनते समय डर महसूस करती हैं। हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मिथक की सच्चाई स्पष्ट करते हुए कहा है कि इसमें कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
ब्रा और कैंसर के बीच कोई डायरेक्ट लिंक नहीं
विशेषज्ञ बताते हैं कि स्तन कैंसर के लिए मुख्य जोखिम कारक हैं:
उम्र और जीन (BRCA1/BRCA2 म्यूटेशन)
हार्मोनल बदलाव
परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास
असंतुलित आहार और जीवनशैली
इस सूची में ब्रा का रंग या टाइटनेस शामिल नहीं है। ब्रा केवल स्तन को सपोर्ट देती है और आरामदायक फिटिंग रखने में मदद करती है।
टाइट ब्रा पहनने के संभावित असर
हालांकि टाइट ब्रा पहनने से त्वचा पर निशान या असुविधा हो सकती है। लंबे समय तक बहुत टाइट ब्रा पहनने से त्वचा लाल या खुरदरी हो सकती है, लेकिन इससे कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता। कुछ महिलाएं कंधों और पीठ में दर्द महसूस कर सकती हैं, जिसका कारण केवल ब्रा का सही फिट न होना है।
ब्रांड और कलर का कैंसर से कोई संबंध नहीं
ब्रा का रंग या फैब्रिक स्तन कैंसर के जोखिम को प्रभावित नहीं करता।
प्राकृतिक या सिंथेटिक फैब्रिक का फर्क केवल आराम और स्किन रिएक्शन तक सीमित है।
लाल, काला, या किसी भी रंग की ब्रा पहनना स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित है।
विशेषज्ञ की सलाह
स्तन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. कहती हैं, “महिलाओं को ब्रा पहनते समय सही फिटिंग और आराम पर ध्यान देना चाहिए। यह केवल त्वचा और मांसपेशियों की रक्षा करता है। स्तन कैंसर का खतरा किसी भी तरह के ब्रा रंग या टाइटनेस से नहीं जुड़ा है। नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली ही कैंसर से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।”
विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि सही साइज और सपोर्ट वाली ब्रा चुनने से स्तन का आकार सही रहता है और पीठ तथा कंधों पर दबाव कम होता है।
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